जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरिजी के सान्निध्य में तीन दिवसीय महायज्ञ का श्रीगणेश
जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरिजी के सान्निध्य में तीन दिवसीय महायज्ञ का श्रीगणेश


- बीकानेर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार
बीकानेर, 24 फरवरी। गंगाशहर मार्ग स्थित अग्रवाल भवन मंगलवार को मंत्रोच्चारण और भक्ति गीतों से गुंजायमान हो उठा। श्री पार्श्व पद्मावती सेवा न्यास (इंदौर) और श्री पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट (कृष्णगिरि, तमिलनाडु) के तत्वावधान में जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरिजी महाराज के पावन सान्निध्य में तीन दिवसीय ‘सर्व कष्ट निवारक महायज्ञ’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस महायज्ञ में भाग लेने के लिए न केवल बीकानेर, बल्कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं।


बनारस के विद्वानों का मंत्रोच्चार और देव आह्वान
यज्ञ की शुरुआत शास्त्रीय विधि-विधान के साथ हुई, जिसमें जगद्गुरु स्वयं बनारस के 11 वेद पाठी ब्राह्मणों का नेतृत्व कर रहे हैं।


प्रथम दिन के अनुष्ठान: आयोजन के पहले दिन मंडप पूजन के साथ भगवान शिव, देवी पार्वती, माता पद्मावती, लक्ष्मी, बटुक भैरव और हनुमानजी की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कर उनका आह्वान किया गया।
भक्तिमय वातावरण: महायज्ञ के दौरान ‘मेरे लाडले प्यारे गणेश’ और ‘ए काल रात्रि कल्याणी’ जैसे भजनों की प्रस्तुति ने समूचे वातावरण को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
नियमित समय: यह अनुष्ठान बुधवार और गुरुवार को भी शाम 5:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक अनवरत जारी रहेगा।
आगामी नवरात्र महोत्सव की घोषणा: 19 मार्च से होगा आयोजन
ट्रस्टी संकेश जैन ने बताया कि यह महायज्ञ एक भव्य आध्यात्मिक शृंखला का हिस्सा है।
पुनः आगमन: जगद्गुरु अपने 50 स्वयंसेवकों और संगीतकारों के दल के साथ 9 मार्च को पुनः बीकानेर पहुंचेंगे।
नवरात्र अनुष्ठान: आगामी 19 से 29 मार्च 2026 तक अग्रवाल भवन में ही ‘सनातन सिद्धि नवरात्र महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इससे पूर्व इंदौर और जोधपुर जैसे शहरों में आयोजित ऐसे कार्यक्रमों में हजारों श्रद्धालु लाभान्वित हो चुके हैं।
थोट योगा और वैश्विक जुड़ाव
गौरतलब है कि जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरिजी महाराज न केवल सनातन परंपराओं के संवाहक हैं, बल्कि उनके द्वारा प्रवर्तित ‘थोट योगा’ (Thought Yoga) के माध्यम से देश-विदेश के लाखों लोग मानसिक शांति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े हुए हैं। बीकानेर के श्रद्धालुओं के लिए यह महायज्ञ कष्ट निवारण के साथ-साथ आत्मिक शुद्धि का एक सुनहरा अवसर बनकर आया है।
