267वें दिन भी पर्यावरण संघर्ष समिति का आंदोलन जारी, गूँजी वनस्पति बचाने की आवाज, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने दिया समर्थन
नोखा में एनएफएसए लाभार्थियों से संवाद और जनसुनवाई बुधवार को


बीकानेर, 10 अप्रैल। शुद्ध पर्यावरण और विश्व शांति को आज के समय की सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती बताते हुए पर्यावरण संघर्ष समिति का आंदोलन बीकानेर में निरंतर जारी है। कलेक्ट्रेट के सामने चल रहे इस धरने को आज 267 दिन पूरे हो गए, वहीं खेजड़ला रोही (नोखा दईया) में चल रहा धरना 632वें दिन में प्रवेश कर गया है।


धरने को संबोधित करते हुए पर्यावरणविद सज्जन कुमार बेनीवाल ने कहा कि शुद्ध पर्यावरण किसी भी इंसान की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिन देशों में जनता जागरूक नहीं है, वहां वनस्पति का विनाश तेजी से हो रहा है, जो वैश्विक संकट का संकेत है। बेनीवाल ने आह्वान किया कि विश्व शांति और मानव अस्तित्व को बचाने के लिए हमें प्राकृतिक वनस्पति के संरक्षण की पहल युद्ध स्तर पर करनी होगी।


सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान ने जताया समर्थन
आंदोलन की मजबूती तब और बढ़ गई जब मनोहर सिंह लूणा के नेतृत्व में सेवानिवृत्त पुलिस कल्याण संस्थान, बीकानेर के पदाधिकारियों ने धरना स्थल पहुँचकर अपना समर्थन दिया। पूर्व पुलिस अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण की इस लड़ाई को जायज ठहराते हुए समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प लिया। उनके साथ असगर मोहम्मद, किशन लाल चौहान, अनोप सिंह, मेघसिंह, मोतीराम, सुखदेव व्यास सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।
धरने पर मौजूद रहे प्रमुख कार्यकर्ता
पर्यावरण संघर्ष समिति के बीकानेर धरने पर आज गिरधारी कूकणा, शिवदान मेघवाल, शांतिलाल सेठिया, रामगोपाल बिश्नोई, कृष्ण कुमार बिश्नोई, और हरिराम खीचड़ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा पूर्व सरपंच बलराम मेघवाल, कॉमरेड मूलचंद खत्री, हनुमान महिया, हरमत अली, और हुसैन हिंदुस्तानी सहित दर्जनों पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण उपस्थित रहे। समिति के सदस्यों ने साफ किया कि जब तक पर्यावरण संरक्षण की उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, यह शांतिपूर्ण आंदोलन अनवरत जारी रहेगा।


