लुप्त होती पारंपरिक ‘फड़ चित्रकला’ को सहेजने के लिए बीकानेर में कार्यशाला शुरू

लुप्त होती पारंपरिक 'फड़ चित्रकला' को सहेजने के लिए बीकानेर में कार्यशाला शुरू
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बीकानेर, 20 जून । अजित फाउण्डेशन के तत्वावधान में राजस्थान की प्रसिद्ध लोककला ‘फड़ चित्रकला’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक सप्ताह की विशेष कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक, सुप्रसिद्ध चित्रकार एवं महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राकेश किराडू ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए अपनी लोककलाओं से जुड़े रहना अनिवार्य है, क्योंकि लोक को जाने बिना कोई भी अपनी संस्कृति को गहराई से नहीं पहचान सकता। उन्होंने कला की महिमा को रेखांकित करते हुए कहा कि कलाकार निराकार को साकार और अमूर्त को मूर्त रूप देने की अद्भुत क्षमता रखता है।

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डॉ. किराडू ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि फड़ चित्रकला शैली वर्तमान में राजस्थान के भीलवाड़ा क्षेत्र तक ही सीमित होकर रह गई है, इसलिए इस ऐतिहासिक लोककला को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयासों की महती आवश्यकता है। उन्होंने चित्रकला की विभिन्न शैलियों का जिक्र करते हुए बताया कि रंगों के संयोजन और चित्रों की बनावट देखकर ही किसी विशिष्ट शैली की पहचान की जा सकती है। इस सात दिवसीय कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को फड़ चित्रकला के इतिहास, इसकी बारीकियों, तकनीकों और पारंपरिक रंग-संयोजन के बारे में सैद्धांतिक और प्रायोगिक (प्रैक्टिकल) रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।

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कार्यशाला के पहले दिन जयश्री सुथार, निशा सुथार और राम भादाणी ने सहायक प्रशिक्षकों के रूप में प्रतिभागियों को मानवाकृति (ह्यूमन फिगर) चित्रण और इसकी विशिष्ट तकनीकों के बारे में प्रायोगिक जानकारी दी। इससे पूर्व, संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पूरा आयोजन ‘लर्निंग बाई डूइंग’ (करके सीखने) के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे युवा पीढ़ी इस पारंपरिक कला को न केवल समझ सके बल्कि इसके संवर्धन में भी अपना योगदान दे सके। इस अनूठी फड़ चित्रकला कार्यशाला में शहर के लगभग 52 युवा-युवतियां बड़े उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं।

 

sjps