माता महालक्ष्मी मंदिर का 116वां स्थापना दिवस
माता महालक्ष्मी मंदिर का 116वां स्थापना दिवस


- सामाजिक सहभागिता ही समाज उत्थान का आधार’ — श्याम श्रीमाली
बीकानेर, 9 फ़रवरी । बेणीसर बारी के बाहर स्थित प्राचीन माता महालक्ष्मी मंदिर के 116वें स्थापना दिवस के अवसर पर श्री श्रीमाली ब्राह्मण समाज द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भक्ति और उल्लास के बीच आयोजित इस समारोह में समाज की एकजुटता और पूर्वजों की विरासत को संजोने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्रीमाली समाज के अध्यक्ष श्याम श्रीमाली ने समाज के विकास को एक वटवृक्ष की उपमा देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा रोपित भक्ति का यह बीज आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है, जिसकी छाया में हम समाज हित के कार्य कर रहे हैं।


श्याम श्रीमाली ने इस बात पर जोर दिया कि दिवंगत महाविभूतियों की दूरगामी सोच के कारण ही आज समाज के पास अपना भव्य मंदिर और भवन उपलब्ध है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक हर व्यक्ति सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित नहीं करेगा, तब तक समाज का सर्वांगीण उत्थान संभव नहीं है।


युवा पीढ़ी को संस्कारों और शिक्षा से जोड़ने का आह्वान
विशिष्ट अतिथि और समाजसेवी भारत प्रकाश श्रीमाली ने कहा कि आने वाली पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए हर आयु वर्ग के लोगों को सामाजिक सरोकारों से जुड़ना अनिवार्य है। वहीं शिक्षाविद् श्रीदत्त दवे ने नैतिक जिम्मेदारियों को समझने पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ समाज के प्रति समर्पण ही एक मजबूत और संगठित समाज की नींव रखता है। समाजसेवी रमेश श्रीमाली ने सुझाव दिया कि सांस्कृतिक गतिविधियों में युवाओं की उपस्थिति बढ़ानी चाहिए ताकि वे अपने पौराणिक मूल्यों को आत्मसात कर सकें।
समाज की प्रतिभाओं और विभूतियों का सम्मान
इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया।
अति विशिष्ट सम्मान: मंदिर निर्माण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय सहयोग के लिए भारत प्रकाश श्रीमाली को नवाजा गया।
विशेष सम्मान: बार एसोसिएशन नागौर के अध्यक्ष एवं युवा अधिवक्ता पवन श्रीमाली को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
समाज गौरव सम्मान: उत्कृष्ट विभागीय सेवाओं के लिए नरेश श्रीमाली और गोविंद नारायण श्रीमाली को सम्मानित किया गया।
संगीत एवं कला: ‘स्वर लहर-2025’ जोधपुर में गायन का लोहा मनवाने वाले यश, उदित, उर्वी, फणीन्द्र, नितेश और प्रियल श्रीमाली को प्रतीक चिह्न भेंट किए गए।
शिक्षा एवं खेल: निमिषा, विदुषी, नमन, नंदनी (शिक्षा) तथा कुंज, श्रेयांश और ईशा (खेल) सहित दर्जनों मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित किया गया।
धार्मिक अनुष्ठान और महाआरती
समारोह का शुभारंभ माता महालक्ष्मी के मंदिर पर ध्वजारोहण के साथ हुआ। क्षेत्रपाल भैरवनाथ और विचित्र हनुमान जी की विशेष पूजा-अर्चना की गई। गुजरात के श्री धाम पाटन से लाए गए विशेष कुंकुम से माता का सिंदूराभिषेक संपन्न हुआ। पंडित रवि शंकर, नरेंद्र, मनोज और राहुल के आचार्यत्व में हुए इन अनुष्ठानों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन संजय श्रीमाली ने किया। अंत में 116 दीपकों की ज्योति के साथ माता की महाआरती की गई और प्रसाद वितरण के साथ समारोह संपन्न हुआ।
