पर्यावरण की रक्षा के लिए बीकानेर में शक्ति प्रदर्शन

पर्यावरण की रक्षा के लिए बीकानेर में शक्ति प्रदर्शन
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  • महिलाओं ने निकाली कलश यात्रा, हिमांशु कुमार ने दी ‘जल-जंगल-जमीन’ की लूट के खिलाफ चेतावनी

बीकानेर, 09 फरवरी । राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए बीकानेर में चल रहा जन-आंदोलन अब और प्रखर हो चला है। ‘खेजड़ी बचाओ महापड़ाव’ के आठवें दिन आज मातृशक्ति ने मोर्चा संभालते हुए भव्य कलश यात्रा निकाली। महापड़ाव स्थल से शुरू हुई यह यात्रा शहर के मुख्य कोटगेट क्षेत्र से होते हुए पुनः पड़ाव स्थल तक पहुंची। इस यात्रा की खास बात यह रही कि इसमें बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाओं ने मंगल गीत गाते हुए शिरकत की, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोक-संस्कृति के जुड़ाव को दर्शाता है।

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उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संघर्ष समिति का धरना आज 207वें दिन में प्रवेश कर गया है, वहीं खेजड़ला रोही (नोखा दईया) में चल रहा संघर्ष पिछले 562 दिनों से अनवरत जारी है। महापड़ाव स्थल पर मौजूद देश के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए सत्ता और कॉरपोरेट जगत पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में कॉरपोरेट और सरकार मिलकर जल, जंगल और जमीन की खुली लूट कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।

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सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का विरोध और दमन की नीति

हिमांशु कुमार ने देशव्यापी दमन चक्र का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं को बदनाम और प्रताड़ित करने का काम कर रही है। उन्होंने लद्दाख के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक को जोधपुर जेल में बंद किए जाने की कड़ी निंदा की। कुमार ने कहा, “आज जो कार्यकर्ता प्रकृति को बचाने की बात कर रहे हैं, उन्हें जेलों में डाला जा रहा है। हमारी यह यात्रा और समर्थन उसी दमनकारी नीति के खिलाफ एक आवाज़ है।”

आंदोलन में उमड़ा भारी जनसमर्थन
पर्यावरण संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह महापड़ाव जारी रहेगा। आज के धरने पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए। इनमें समस्तीपुर (बिहार) के अमन चौधरी, रायसिंहनगर के कपिल पूनिया, और बीकानेर के प्रमुख चेहरों सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

धरने में शिवदान मेघवाल, मनीष रोझ, गंगाबिशन सियाग, शांतिलाल सेठिया, प्रेमरतन जोशी और हुसैन हिंदुस्तानी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। महिलाओं में सिंवरी चौधरी, शशिकला राठौड़ और मुरली पन्नू ने भी नेतृत्व करते हुए आंदोलन को मजबूती प्रदान की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि थार की जीवनरेखा है और इसकी बलि किसी भी कॉरपोरेट प्रोजेक्ट के लिए नहीं दी जाने दी जाएगी।

 

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