कजाकिस्तान से MBBS कर लौटे 3 डॉक्टर गिरफ्तार, 74 लाख में खरीदे थे जाली FMG सर्टिफिकेट

कजाकिस्तान से MBBS कर लौटे 3 डॉक्टर गिरफ्तार, 74 लाख में खरीदे थे जाली FMG सर्टिफिकेट
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  • मेडिकल जगत में हड़कंप

जयपुर, 7 जून। राजस्थान में चिकित्सा क्षेत्र में चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने शनिवार को तीन और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। इन तीनों डॉक्टरों पर विदेश (कजाकिस्तान) से एमबीबीएस (MBBS) करने के बाद कुल 74 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत देकर फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) परीक्षा का फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने का गंभीर आरोप है। इस जाली दस्तावेज के दम पर आरोपियों ने न केवल सरकारी मेडिकल कॉलेजों से अपनी इंटर्नशिप पूरी की, बल्कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में अपना अस्थायी (टेंपरेरी) रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया।

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एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में डॉ. दीपक यादव (28) निवासी चौमूं (जयपुर), डॉ. राजू गुर्जर (28) निवासी डीग और डॉ. नरेश गुर्जर (30) निवासी कठूमर (अलवर) शामिल हैं। जांच में सामने आया कि ये तीनों आरोपी कजाकिस्तान से डिग्री लेकर भारत लौटे थे, लेकिन भारतीय चिकित्सा संकायों में अभ्यास के लिए अनिवार्य राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान की ‘एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा’ को कई प्रयासों के बावजूद पास नहीं कर पा रहे थे। इसके बाद इन्होंने दलालों के जरिए फेक सर्टिफिकेट सिंडिकेट से संपर्क साधा।

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पुलिस के अनुसार, डॉ. दीपक यादव ने 24 लाख रुपये देकर जाली सर्टिफिकेट बनवाया और दौसा मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की। वहीं, डॉ. नरेश गुर्जर ने 23 लाख रुपये में सौदा कर अलवर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप पूरी की। नरेश ने बाद में अपने अन्य साथियों को भी इस गिरोह से जोड़ा, जिसमें डॉ. राजू गुर्जर ने 27 लाख रुपये देकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज से अपनी इंटर्नशिप पूरी कर ली।

एसओजी के महानिरीक्षक (IG) अजयपाल लांबा ने बताया कि इस रैकेट की जड़ें बहुत गहरी हैं। आरएमसी के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से राजस्थान के कई मेडिकल कॉलेजों में ऐसे फर्जी डॉक्टर इंटर्नशिप कर रहे हैं। एसओजी अब तक ऐसे 100 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों को चिह्नित कर चुकी है। गौरतलब है कि इस मामले में कजाकिस्तान से स्नातक करने वाले 17 डॉक्टरों सहित आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर, एलडीसी फरहान हसन और मुख्य मास्टरमाइंड भानाराम माली को पहले ही जेल भेजा जा चुका है। गिरोह का मुख्य सरगना भानाराम प्रति डॉक्टर 20 से 30 लाख रुपये लेकर यह पूरा खेल रचता था। फिलहाल, एसओजी की टीम तीनों नए आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है, जिससे कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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