हाईकोर्ट के फैसले में ‘बिश्नोई गैंग’ शब्द का इस्तेमाल पर बिश्नोई समाज ने आपत्ति जताई

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बीकानेर , 29 अगस्त। राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा को रद्द करने के जयपुर हाईकोर्ट के फैसले में ‘बिश्नोई गैंग’ शब्द के इस्तेमाल पर बिश्नोई समाज ने आपत्ति जताई है। अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई सभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज बिश्नोई ने मांग की है कि इस शब्द को फैसले से हटाया जाए, क्योंकि यह पूरे समाज की भावनाओं को आहत करता है।
बिश्नोई समाज की आपत्ति का आधार
शिवराज बिश्नोई ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बिश्नोई एक शांतिप्रिय और पर्यावरण-संरक्षण करने वाला समुदाय है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने 202 पन्नों के फैसले में 12 बार “बिश्नोई गैंग” शब्द का उपयोग किया है, जिससे पूरे समाज की छवि खराब होती है। महासभा ने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस शब्द को हटाने और उसकी जगह किसी अन्य शब्द का उपयोग करने का आग्रह किया है।

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हाईकोर्ट के फैसले में ‘बिश्नोई गैंग’ शब्द का इस्तेमाल पर बिश्नोई समाज ने आपत्ति जताई

फैसले की पृष्ठभूमि

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न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने प्रश्नपत्र लीक मामले में सुनवाई के बाद 28 अगस्त को 892 पदों के लिए आयोजित SI भर्ती परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया था। इस घोटाले में अब तक 68 सब-इंस्पेक्टर गिरफ्तार हो चुके हैं। एसओजी की जांच में कोचिंग संस्थानों, परीक्षा केंद्रों और राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई थी। कोर्ट ने इसे एक साधारण मामला मानने से इनकार कर दिया और भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना ही सही माना।

ओवरएज हो चुके उम्मीदवारों को राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने सब-इंस्पेक्टर भर्ती-2021 में शामिल हुए और अब ओवरएज हो चुके उम्मीदवारों को राहत दी है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने रामगोपाल व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए इन उम्मीदवारों को एसआई भर्ती-2025 में आवेदन करने की अनुमति दी है। यह अंतरिम आदेश तब आया है, जब राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा 2025 में जारी भर्ती विज्ञापन में 2021 के उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में कोई विशेष छूट नहीं दी गई थी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने तर्क दिया था कि 2021 की भर्ती प्रक्रिया में हुई देरी और पेपर लीक जैसे मामलों की वजह से कई उम्मीदवार आयु सीमा पार कर गए हैं, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार और आरपीएससी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, और तब तक याचिकाकर्ताओं को आवेदन की अनुमति दे दी है।

 

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