प्रेम और मैत्री का आधार है क्षमा- साध्वी पुण्ययशा

प्रेम और मैत्री का आधार है क्षमा- साध्वी पुण्ययशा
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बीकानेर, 29 अगस्त। बीकानेर में युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की शिष्या साध्वी पुण्ययशा ने क्षमापर्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि क्षमा प्रेम और मैत्री की नींव है। उन्होंने कहा कि क्षमा का मतलब प्रतिक्रिया और बदले की भावना को रोक देना है, जिससे आपसी सौहार्द बढ़ता है।
क्षमा की शक्ति
साध्वी जी ने समझाया कि जब कोई व्यक्ति क्रोध करता है, तो उसे बाद में पछतावा और थकान महसूस होती है, लेकिन जब वह क्षमा कर देता है, तो मन में शांति, संतोष और सुख का अनुभव होता है। उन्होंने संवत्सरी को ‘दिल से दिल जोड़ने का दिन’ बताया।

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कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी बोधिप्रभाजी ने एक सुंदर गीतिका “जीवन की पोथी पढ़ने का सुन्दर अवसर आया है” से की। तेरापंथ सभा और ट्रस्ट के अध्यक्ष राकेश जी छाजेड़, पूर्व अध्यक्ष कमलसिंह दुगड़, युवक परिषद अध्यक्ष विक्रम महेर, और महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती मंजु बोथरा सहित कई पदाधिकारियों ने भी क्षमा याचना करते हुए मैत्री दिवस की शुभकामनाएं दीं। मंच का संचालन सी.पी.एस. प्रभारी दिनेश जी मरोठी ने किया।

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तप और साधना का उत्सव
साध्वी श्री के सानिध्य में चले पर्युषण पर्व के दौरान, कई श्रावक-श्राविकाओं ने तपस्या की। इसमें एक पचरंगी तप, 10 अठाई, 3 नौ दिन की तपस्या, 8 पंचोले, एक 7 दिन का तप, 45 तेले, 55 बेले और सैकड़ों उपवास शामिल थे। संवत्सरी के दिन, तेरापंथ भवन में 141 लोगों ने पौषध व्रत किया। कार्यक्रम का समापन साध्वी श्री के मंगल पाठ के साथ हुआ।

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