प्राइवेट हॉस्पिटल में ‘मौत का सच’- PBM मेडिकल बोर्ड ने डॉक्टर को दी क्लीनचिट, कांग्रेस नेता बोले- ‘परिजनों से बात क्यों नहीं की?’

प्राइवेट हॉस्पिटल में 'मौत का सच, राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला-आयुष्मान हार्ट अस्पताल
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quicjZaps 15 sept 2025
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बीकानेर, 6 अक्टूबर । बीकानेर के प्राइवेट आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर में एक रोगी की मौत के मामले में सोमवार को एक सनसनीखेज मोड़ आ गया है। इस मामले में पीबीएम अस्पताल के मेडिकल बोर्ड ने हार्ट केयर सेंटर के डॉक्टर को प्रथम दृष्टया क्लीनचिट दे दी है, जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने इस रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
डॉक्टर को क्लीनचिट, आरोप खारिज
रोगी रामेश्वर लाल (पुत्र मुखराम) की 12 सितंबर को हुई मौत के बाद से ही कांग्रेस नेताओं ने डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया था।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट: सोमवार को जारी दो पेज की मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि “प्रथम दृष्ट्या डॉक्टर की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।” रिपोर्ट के अनुसार, रोगी के उपचार में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही सामने नहीं आई है।

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डॉक्टर का दावा और मानहानि: आरोपों को खारिज होने के बाद आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. स्वामी ने उन पर लगे आरोपों को गंभीर गलत आरोप बताया है। उन्होंने कहा है कि यह मामला मानहानि का बनता है और उन्होंने दो करोड़ रुपए की मानहानि का दावा करने की जानकारी दी है।

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‘यह फैसला आना तय था’: विपक्ष ने घेरा
मेडिकल बोर्ड की क्लीनचिट रिपोर्ट जारी होते ही, धरने पर बैठे कांग्रेस नेता रामनिवास कूकणा ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। “मेडिकल बोर्ड ने मृतक के परिजनों से किसी तरह की बात ही नहीं की। ऐसे में ये ही फैसला आना तय था। मेडिकल बोर्ड को मृतक के परिजनों से बातचीत करनी चाहिए थी।” कूकणा ने आरोप लगाया कि जब तक परिजनों से बात नहीं होती, तब तक यह रिपोर्ट एकतरफा और संदिग्ध है।

पहली बार नहीं लगा लापरवाही का दाग!
यह मामला केवल रामेश्वर लाल की मौत तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान हार्ट केयर सेंटर पर यह लापरवाही का पहला मामला नहीं है। इस अस्पताल पर पहले भी इलाज में लापरवाही के आरोप लगते रहे हैं। विपक्षी नेताओं और परिजनों का आरोप है कि सरकारी नियामक एजेंसियों द्वारा प्राइवेट अस्पतालों की पूरी और निष्पक्ष जाँच नहीं करने के कारण ही लापरवाही की ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रहती हैं।

क्या यह क्लीनचिट आंदोलन को खत्म कर पाएगी, या अब यह मामला मानहानि और न्याय की नई लड़ाई में बदलेगा?

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