पीबीएम हॉस्पिटल में आग लगने की सूचना पर खुली पोल- डॉक्टर्स की टीम देर से पहुँची, खुले तार और सीलन बने बड़ा खतरा

पीबीएम हॉस्पिटल में आग लगने की सूचना पर खुली पोल
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बीकानेर, 25 नवंबर । जयपुर के एसएमएस अस्पताल में आग लगने की घटना के बाद प्रदेशभर के बड़े अस्पतालों की व्यवस्थाओं को परखने के क्रम में, मंगलवार को बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल के डी वार्ड में आग लगने की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस ड्रिल में अस्पताल प्रशासन की कई गंभीर अव्यवस्थाएँ सामने आईं, जिन पर त्वरित कार्रवाई न होने पर संकट के समय बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।
ट्रॉमा सेंटर में सबसे बड़ी लापरवाही
मॉक ड्रिल के दौरान डी वार्ड में आग लगने की सूचना मिलते ही अग्निशमन टीम तो तुरंत मौके पर पहुँच गई और पाइप भी बिछा दिया गया, लेकिन ट्रॉमा हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की टीम समय पर नहीं पहुँची।

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सीनियर डॉक्टर अनुपस्थित: घायलों को ट्रॉमा सेंटर ले जाए जाने पर, उनके इलाज के लिए एक भी सीनियर डॉक्टर उपस्थित नहीं मिला। सीएमओ डॉ. कपिल ने मोर्चा संभाला और घायलों का इलाज शुरू किया।

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अधीक्षक का बयान: पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने स्वीकार किया कि बाकी व्यवस्थाएँ ठीक थीं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में लापरवाही सामने आई है, जिसे जल्द ही ठीक करने के प्रयास किए जाएँगे।

खुले तार और सीलन: खतरे का संकेत
मॉक ड्रिल के दौरान मेडिकल एज्यूकेशन डिपार्टमेंट की टीम ने कई तकनीकी कमियाँ पाईं, जिन्हें तत्काल ठीक करना जरूरी है। इनमें सबसे बड़ा संकट वार्ड में खुले पड़े बिजली के तारों को माना गया। इसके अलावा, वार्ड की दीवारों में आ रही सीलन भी खतरे का संकेत मानी गई।

राजमेस ने भी पकड़ी कमियाँ
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (राजमेस) के अधिकारी डॉ. गोपाल झालानी ने बताया कि तीन सदस्यीय दल ने मेंटीनेंस और फायर सेफ्टी को लेकर एसपी मेडिकल कॉलेज व संबद्ध हॉस्पिटल्स का निरीक्षण किया। उन्होंने पुष्टि की कि पीबीएम अस्पताल के डी वार्ड में कुछ कमियाँ पाई गई हैं। इसी टीम ने गंगाशहर हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण भी किया, जहाँ उन्हें डॉक्टर्स अनुपस्थित मिले।

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