डॉ. वीर बहादुर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दिया व्याख्यान- “यूरिक एसिड और हाइपरटेंशन” के खतरे समझाए

डॉ. वीर बहादुर सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दिया व्याख्यान
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खमत खामणा

बीकानेर, 29 नवंबर । बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. वीर बहादुर सिंह ने एशिया पेसिफिक सोसाइटी ऑफ हाइपरटेंशन के तत्वावधान में लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में “यूरिक एसिड और हाइपरटेंशन” विषय पर महत्वपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के करीब 975 प्रतिनिधियों तथा 78 वक्ताओं ने भाग लिया, जिसमें 18 देशों के चिकित्सकों ने शोध पत्र और व्याख्यान प्रस्तुत किए।

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यूरिक एसिड बढ़ा सकता है हृदय और किडनी रोगों का खतरा

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डॉ. वीर बहादुर सिंह ने अपने व्याख्यान में भारतीय लोगों में उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) की बढ़ती संभावना पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि 30 से 42% बीपी के मरीजों में यूरिक एसिड बढ़ा हुआ पाया जाता है।उन्होंने यूरिक एसिड को भी उच्च रक्तचाप (बीपी) का एक प्रमुख रिस्क फैक्टर माना।

गंभीर परिणाम: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यूरिक एसिड का सही समय पर इलाज न किया जाए, तो कार्डियोवेस्कुलर (हृदय संबंधी) समस्याएं और किडनी फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। यह उन मरीजों के लिए और भी खतरनाक होता है, जिन्हें शुगर के साथ-साथ कार्डियक प्रॉब्लम भी हो।

गठिया और गलत इलाज की समस्या
डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने से हाथ-पैर के छोटे जोड़ों में दर्द होता है, जिससे लोग गठिया (Gout) से ग्रसित हो जाते हैं। अक्सर, पीड़ित व्यक्ति अप्रशिक्षित लोगों से गलत इलाज लेते हैं, जिससे उनकी स्थिति और भी जटिल हो जाती है। उन्होंने उच्च रक्तचाप के मरीजों को लगातार जांच करवाने और समय-समय पर उचित इलाज के लिए योग्य चिकित्सकों से संपर्क करने की सलाह दी।

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