चेक अनादरण मामले में अभियुक्त को 9 माह की सज़ा और ₹20.90 लाख का जुर्माना

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बीकानेर, 29 नवंबर । चेक अनादरण (Cheque Bounce) के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में, बीकानेर की न्यायालय विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट की एक्ट प्रकरण संख्या 3 ने अभियुक्त को 9 महीने के साधारण कारावास की सज़ा सुनाई है, साथ ही उसे चेक की राशि का दुगुना यानी ₹20,90,000 का जुर्माना परिवादी को देने का आदेश दिया है।
पूरा मामला
न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ललित कुमार जी (RJS) के न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार: परिवादी (शिकायतकर्ता): तरुण जांगिड़, अभियुक्त: अमित बंसल. परिवादी तरुण जांगिड़ ने अभियुक्त अमित बंसल को व्यक्तिगत ज़रूरत के आधार पर ₹10,45,000 की राशि उधार दी थी। इसके एवज में अभियुक्त ने परिवादी को इसी राशि का एक चेक दिया था। जब अभियुक्त ने यह उधार ली गई राशि वापस नहीं लौटाई, तो परिवादी तरुण जांगिड़ ने वह चेक अपनी बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन वह अनादरित (बाउंस) हो गया।
न्यायालय का निर्णय
इसके बाद, परिवादी तरुण जांगिड़ ने अभियुक्त अमित बंसल के विरुद्ध धारा 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के तहत 27 अक्टूबर 2014 को एक परिवाद प्रस्तुत किया।
माननीय न्यायालय ने इस प्रकरण पर 28 नवंबर 2025 को अपना फैसला सुनाते हुए अभियुक्त अमित बंसल को निम्नलिखित सज़ा और जुर्माना देने का आदेश दिया। सज़ा: 9 महीने का साधारण कारावास। जुर्माना/मुआवजा: चेक में वर्णित राशि का दुगुना यानी ₹20,90,000 का जुर्माना परिवादी तरुण जांगिड़ को दिया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि यदि अभियुक्त जुर्माना राशि अदा नहीं करता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। परिवादी तरुण जांगिड़ की ओर से इस प्रकरण में पैरवी अधिवक्ता रीतेश महात्मा द्वारा की गई।

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