ज़माना ख़राब है, ज़रा संभल कर रहें: ब्लैकमेलिंग के जाल में फंसे 55 वर्षीय दुकानदार

shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025

बीदासर मेंब्लैकमेलिंग के जाल में फंसे 55 वर्षीय दुकानदार, पुलिस ने अभी चालान पेश नहीं किया

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

बीदासर (चूरू), 30 नवंबर । राजस्थान के चुरू जिले के शांत कस्बे बीदासर में एक सच्ची घटना सामने आई है, जिसने लोगों को भावनात्मक खालीपन और आधुनिक ब्लैकमेलिंग के खतरों के प्रति आगाह किया है। यह कहानी बताती है कि उम्र कोई सुरक्षा कवच नहीं है, और एक पल की भावनात्मक कमज़ोरी वर्षों की इज़्ज़त को पल भर में मिट्टी में मिला सकती है।
एकाकीपन और लालच का जाल
बीदासर के 55 वर्षीय मोबाइल दुकानदार चंद्रप्रकाश छापोला अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाते थे। उनका जीवन सरल है । एक दिन उनकी दुकान पर 22 वर्षीय लड़की आई। मीठी बातों और बड़ी आँखों वाली लड़की ने नया फोन देखने के बहाने चंद्रप्रकाश छापोला से संपर्क साधा। उसने अपना नंबर दिया और जल्द ही दोनों के बीच मैसेजिंग और कॉल शुरू हो गईं। भावनात्मक खालीपन महसूस कर रहे रामस्वरूप जी लड़की की ‘केयर’ वाली बातों में बहक गए और दो दिन में ही उस पर दिल हार बैठे।

pop ronak
kaosa

तीसरे दिन, लड़की के बुलावे पर चंद्रप्रकाश छापोला एक छोटे से होटल में उससे मिलने पहुँचे। यह एक ऐसी भूल थी, जो उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा पछतावा बनने वाली थी।

ब्लैकमेलिंग और फिरौती की धमकी
शाम को दुकान लौटने पर चंद्रप्रकाश छापोला के होश उड़ गए, जब उन्हें व्हाट्सएप पर एक वीडियो मिला। यह वीडियो होटल के कमरे का था, जिसमें वे और लड़की मौजूद थे।
वीडियो के साथ लड़की का मैसेज था: “5 लाख रुपये। सुबह तक। नहीं तो ये वीडियो पूरे बीदासर में वायरल। और फर्जी रेप का केस भी ठोंक दूँगी। पुलिस तेरे घर आएगी।” चंद्रप्रकाश छापोला सदमे में आ गए। वर्षों से बनाई गई उनकी इज़्ज़त दांव पर थी। रात भर की बेचैनी के बाद, उन्होंने हिम्मत दिखाई और सुबह होते ही बीदासर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिलीपसिंह के सामने रोते हुए सारी बात बताई और वीडियो दिखाया।

पुलिस का जाल और रंगे हाथ गिरफ़्तारी
थाना प्रभारी दिलीपसिंह ने तुरंत कार्रवाई का निर्णय लिया। उन्होंने चंद्रप्रकाश छापोला को लड़की को मैसेज करने के लिए कहा कि पैसे तैयार हैं, लेकिन वह अभी सिर्फ 2 लाख रुपये दे सकते हैं। सुबह 6 बजे, एक सुनसान जगह पर पैसे देने की जगह तय हुई।

जैसे ही लड़की अपने साथी के साथ वहाँ पहुँची और ₹2 लाख का लिफाफा हाथ में लिया, पहले से मुस्तैद पुलिस टीम ने उन्हें रंगे हाथ पकड़ लिया। लड़की और उसकेसाथी दोनों का ब्लैकमेलिंग का यह प्लान पूरी तरह विफल हो गया। पुलिस ने उनके मोबाइल से चैट और वीडियो जैसे पुख्ता सबूत बरामद किए।

सबक: इज़्ज़त और आज़ादी के लिए हिम्मत ज़रूरी
बीकानेर निवासी लड़की और उसके साथी अब ब्लैकमेलिंग के केस में जेल की हवा खा रहे हैं। चंद्रप्रकाश छापोला की इज़्ज़त तो बच गई, लेकिन इस घटना ने उन्हें एक कड़वा सबक दिया।

इस सच्ची घटना से तीन बड़े सबक मिलते हैं:

  • भावनात्मक खालीपन से सावधान: अकेलापन और भावनात्मक खालीपन सबसे बड़ी कमज़ोर कड़ी होते हैं। अनजान व्यक्ति की मीठी बातों पर तुरंत भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
  • प्रेम और जाल में फर्क: जो संबंध दो दिन में बिस्तर तक पहुँच जाए, वह प्रेम नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग का जाल हो सकता है। अनजान व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने से पहले परिणाम के बारे में सौ बार सोचें।
  • डरें नहीं, तुरंत पुलिस के पास जाएँ: ब्लैकमेल होने पर शर्म या डर के कारण चुप रहना ठगों को मजबूत करता है। रामस्वरूप जी ने हिम्मत दिखाई, इसलिए उनकी इज़्ज़त और आज़ादी दोनों बच गईं।

बीदासर की वह दुकान आज भी खुली है, लेकिन अब चंद्रप्रकाश छापोला किसी अनजान नंबर पर कॉल करने से पहले सौ बार सोचते हैं। पीड़ित दडीबा गांव के रहने वाले चंद्रप्रकाश छापोला हैं जिन्हें बीकानेर की रहने वाली इस महिला ने पहले दोस्ती का झांसा दिया. धीरे-धीरे बातें प्यार की शक्ल लेने लगीं और व्यक्ति उसके चंगुल में फंस गया.
मुकदमे की धमकी देकर मांगे 20 लाख
महिला ने अपने एक साथी के साथ मिलकर योजना बनाई. उन्होंने झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और 20 लाख रुपये की मांग की. चंद्रप्रकाश छापोला ने अपनी इज्जत बचाने के डर से पहले तीन लाख रुपये दे दिए. लेकिन महिला की लालच नहीं रुकी. उसने और ज्यादा पैसे मांगे तो पीड़ित ने हिम्मत जुटाई और बीदासर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया औऱ BNS की धारा 308 (2 ), (3 ) (6 ) के तहत मामला दर्ज करके जांच शुरू की. गयी है। आरोपी अभी जेल भेज दिया गया है।

पुलिस ने दोनों आरोपियों को दबोचा
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि महिला बीकानेर से और उसका सहयोगी सत्यनाराण प्रजापत बीदासर का हैं. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. अब पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के और सदस्यों या ऐसे अन्य मामलों का पता लगाया जा सके। जांच अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि अभी तक चालान नहीं किया गया है। इधर चर्चा मुल्जिमों द्वारा पुलिस को प्रभावित किये जाने की भी हो रही है। आवश्यकता है कि आरोपियों को सख्त सजा मिले ताकि समाज में सही सन्देश जाए।

 

भीखाराम चान्दमल 15 अक्टूबर 2025
mmtc 2 oct 2025

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *