डूंगर कॉलेज में गूँजी ‘ग्रीन केमिस्ट्री’ और ‘ऊंटनी के दूध’ की महिमा

डूंगर कॉलेज में गूँजी 'ग्रीन केमिस्ट्री' और 'ऊंटनी के दूध' की महिमा
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025
  • प्रथम अंतर्राष्ट्रीय वीडियो फिल्म संगोष्ठी का भव्य आयोजन

बीकानेर, 1 मार्च 2026। विज्ञान और सिनेमा के अनूठे संगम के साथ राजकीय डूंगर महाविद्यालय में ‘प्रथम अंतर्राष्ट्रीय वीडियो फिल्म संगोष्ठी’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। डूंगर कॉलेज के रसायन शास्त्र विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज और रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (लंदन) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी ने शोध को केवल कागजों तक सीमित न रखकर ‘दृश्य माध्यम’ (फिल्मों) के जरिए आमजन तक पहुँचाने का नया मार्ग प्रशस्त किया।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

ऊंटनी का दूध और ऑटिज्म: क्रिस्टीना एडम का वैश्विक शोध
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. एस.के. वर्मा ने बताया कि अमेरिका की प्रसिद्ध शोधार्थी और फिल्म मेकर क्रिस्टीना एडम मुख्य आकर्षण रहीं। उन्होंने अपनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से प्रदर्शित किया कि किस प्रकार ऊंटनी का दूध लाइलाज मानी जाने वाली बीमारियों, विशेषकर ऑटिज्म (Autism) के रोकथाम और उपचार में चमत्कारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने शोधार्थियों के कठिन प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए ऊंटनी के दूध की औषधीय उपयोगिता पर वैश्विक डेटा प्रस्तुत किया।

pop ronak

हंगरी से कनाडा तक: डिजिटल मंच पर जुड़ा संसार
कांफ्रेंस डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र भोजक ने बताया कि संगोष्ठी में तकनीक और पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं पर 17 वीडियो फिल्मों का प्रदर्शन हुआ:

ग्रीन केमिस्ट्री: बुडापेस्ट (हंगरी) से जुड़े प्रोफेसर जियोर्जी कैगलिवी ने फास्फीन ऑक्साइड के लिए ‘ग्रीन पद्धति’ पर अपनी प्रेजेंटेशन दी।

भारतीय ज्ञान परंपरा: कनाडा से डॉ. अनुभूति गोयल ने भारतीय प्राचीन ज्ञान और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित फिल्म दिखाई।

सौर ऊर्जा: इटावा (UP) से प्रोफेसर एन.के. शर्मा ने सोलर सेल के दैनिक जीवन में उपयोग और ग्रीन केमिस्ट्री के अंतर्संबंधों को स्पष्ट किया।

पतंजलि का शोध: डॉ. अश्विनी कुमार ठाकुर ने वनस्पति एनसाइक्लोपीडिया की जानकारी दी और शोधार्थियों को पतंजलि संस्थान में कार्यशालाओं हेतु आमंत्रित किया।

दिव्यांगता और मेटा-मटेरियल्स: विविध विषयों पर फिल्मों का प्रसारण
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में तन्वी छेत्री ने ‘केदारकांठा’ पर खूबसूरत मूवी दिखाई, तो वहीं अनिल माकर की फिल्म ने ‘दिव्यांगों की समस्याओं’ पर संवेदनशीलता के साथ प्रकाश डाला। मॉरीशस के फिल्म मेकर राजेश और रफीक ने मेटा-मटेरियल्स के उपयोग पर फिल्में प्रदर्शित कीं। संगोष्ठी के दौरान कश्मीर विश्वविद्यालय के डॉ. चिनप्पा भास्कर और प्रोफेसर अनिल कुमार छंगानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण पर शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

सम्मान समारोह: ऋषि कुमार और तन्वी छेत्री बने ‘बेस्ट फिल्म मेकर’
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर आर.के. शर्मा और विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर दीपक शर्मा (इंदौर) ने विजेताओं को पुरस्कृत किया:

बेस्ट फिल्म/डायरेक्टर अवार्ड: ऋषि कुमार शर्मा, तन्वी छेत्री और अनुभूति गोयल को प्रदान किया गया।

बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन: खुशबू मीणा, देवीलाल कस्बा, मोनिका राठौड़ और दुर्गेश खत्री ने यह गौरव हासिल किया।

पोस्टर प्रेजेंटेशन: दिल्ली के सिद्धार्थ कौशिक, जयपुर की रिचा शर्मा और असम की निजारा दास को सम्मानित किया गया।

प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित ने ऑफलाइन सत्रों का निरीक्षण कर शोधार्थियों के उत्साह की सराहना की। कार्यक्रम में डॉ. हेमेंद्र सिंह भंडारी, डॉ. सत्यनारायण जाटोलिया और डॉ. उमा राठौर सहित महाविद्यालय के अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

vimla devi daftri punnay tithi
sesumo school
sjps

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *