अजित फाउण्डेशन द्वारा भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’ को श्रद्धांजलि: ‘साहित्य के प्रेरणा पुंज’ थे व्यास जी
अजित फाउण्डेशन द्वारा भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’ को श्रद्धांजलि: 'साहित्य के प्रेरणा पुंज' थे व्यास जी


बीकानेर, 7 दिसंबर । बीकानेर के ख्यातनाम साहित्य मनीषी भवानीशंकर व्यास ‘विनोद’ के निधन पर अजित फाउण्डेशन द्वारा एक भावभीनी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि स्व. व्यास ‘विनोद’ अपने साहित्यिक अवदान से लोगों के दिलों में सदैव जीवित रहेंगे।
प्रमुख वक्ताओं के विचार
गोविन्द जोशी (अध्यक्ष, सुरभि साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान): उन्होंने व्यास जी के सान्निध्य में बिताए समय को याद करते हुए कहा कि व्यास ने हमेशा युवा एवं नारीशक्ति को बढ़ाने हेतु प्रयास किए और साहित्यकारों को प्रोत्साहित किया।


प्रेमनारायण व्यास (अध्यक्ष, प्रेरणा प्रतिष्ठान): उन्होंने भवानी शंकर व्यास को अपना आदर्श बताया। उन्होंने कहा कि व्यास जी से ही उन्होंने समय एवं अनुशासन पर चलना और कार्यक्रमों को योजनाबद्ध तरीके से संचालित करना सीखा। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत क्षति बताया।


संजय श्रीमाली (संस्था समन्वयक, अजित फाउण्डेशन): उन्होंने बताया कि व्यास जी साहित्य के प्रेरणा पुंज थे। उन्होंने कई नवोदय लेखकों को तैयार किया, जिससे बीकानेर के साहित्य जगत में ऊर्जा बनी रही। व्यास जी अजित फाउण्डेशन के मार्गदर्शक रहे और संस्था की साहित्यिक पत्रिका ‘विकल्प’ के संपादक भी थे।
बाबू लाल छंगाणी (हास्य एवं व्यंग्य कवि): उन्होंने कहा कि उन्हें मंच संचालन की प्रेरणा भवानीशंकर व्यास से मिली थी।
जुगल किशोर पुरोहित (वरिष्ठ कवि): उन्होंने कहा कि व्यास ने शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में रहकर नई पीढ़ी को संस्कारित किया।
विप्लव व्यास (युवा कवि): उन्होंने कहा कि उन्हें साहित्य की शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन एवं कार्य के प्रति सजगता के गुण व्यास जी से मिले।
गिरिराज पारीक (कवि): उन्होंने कहा कि व्यास जी ने बड़े-बड़े मंचों पर कुशल संचालन करते हुए साहित्य जगत में अपनी अनूठी छाप छोड़ी। कार्यक्रम में सुरभि संस्था के सचिव दिनेश उपाध्याय, देवेन्द्र ओझा, गौरीशंकर शर्मा, परमेश्वर माली सहित कई युवा युवतियां और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
