भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती- कर्नाटक में दो स्थानों पर विशेष धार्मिक आयोजन
भगवान पार्श्वनाथ जन्म जयंती- कर्नाटक में दो स्थानों पर विशेष धार्मिक आयोजन



बेंगलुरु/चन्नपटना, 14 दिसंबर। युगप्रधान, शांतिदूत, महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री पुण्ययशाजी और साध्वी श्री संयमलताजी के सान्निध्य में जैन धर्म के23 वें तीर्थंकर भगवान श्री पार्श्वनाथ की जन्म जयंती कर्नाटक में भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाई गई।



चन्नपटना में चमत्कारी तीर्थंकर का स्मरण
साध्वी श्री पुण्ययशाजी के सान्निध्य में पार्श्वनाथ जयंती समारोह दो चरणों में संपन्न हुआ: प्रथम चरण चन्नपटना में और द्वितीय चरण मर्तिकरे स्कूल में आयोजित किया गया।
ऐतिहासिकता पर प्रकाश: साध्वी श्री पुण्ययशाजी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि भगवान श्री पार्श्वनाथ एक ऐतिहासिक और चमत्कारी तीर्थंकर थे, जिनका जन्म स्थान वाराणसी था। उन्होंने बताया कि विघ्न निवारणार्थ और उपसर्गों को दूर करने के लिए उनका विशेष स्मरण किया जाता है।
नाग-नागिन उद्धार प्रसंग: साध्वी श्री जी ने कथा सुनाई कि राजकुमार अवस्था में उन्होंने अवधि ज्ञान से एक यज्ञ में जल रहे नाग-नागिन के जोड़े को जाना। उन्हें बाहर निकलवाकर नमस्कार महामंत्र सुनाया गया, जिसके फलस्वरूप उनकी सद्गति हुई। वे ही बाद में धरणेन्द्र-पद्मावती नामक देव बने और भगवान पार्श्व के अधिष्ठायक देव हो गए।


स्तोत्रों का महत्व: उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति में निर्मित उवसग्गहर स्तोत्र और कल्याणमंदिर स्तोत्र के ऐतिहासिक और चमत्कारी घटना प्रसंगों को भी विस्तार से बताया।
उपस्थिति: इस अवसर पर मैसूर, शांतिनगर, हनुमंतनगर, राजराजेश्वरी नगर (बेंगलुरु), मंडिया, इगल्टन, बिड़दी और चन्नपटना आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वीश्री बोधिप्रभाजी के मंगलाचरण से हुआ और साध्वी वर्धमानयशाजी ने गीतिका के माध्यम से भगवान पार्श्व की स्तुति की।
राजराजेश्वरी नगर- “सुख शांति दायक है प्रभु पार्श्वनाथ का नाम”
राजराजेश्वरी नगर के तेरापंथ भवन में साध्वी श्री संयमलताजी के सान्निध्य में पार्श्व जयंती का भव्य आयोजन हुआ, जिसका संयुक्त आयोजन राजराजेश्वरी नगर एवं विजयनगर सभा द्वारा किया गया था।
प्रसिद्धि का कारण: साध्वी श्री संयमलताजी ने प्रभु पार्श्व की अति महिमा, प्रसिद्धि और प्रभावना का कारण बताते हुए कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का नाम चमत्कारी है, जो जीवन का अंधकार दूर कर देता है और मन के सारे मनोरथ पूर्ण कर देता है। उन्होंने कहा कि उनका नाम मात्र आज भी दुनिया को सुख शांति प्रदान कर रहा है।
आध्यात्मिक अनुष्ठान: साध्वी मार्दव श्री जी ने प्रभु पार्श्व को रिझाने वाला विशिष्ट आध्यात्मिक अनुष्ठान करवाया। मंत्र और ध्वनि के द्वारा वातावरण को विशुद्ध बनाते हुए शक्तिशाली “नमिऊण” का जप करवाया गया।
संगठन भागीदारी: तेरापंथी सभा, युवक परिषद और महिला मंडल ने पार्श्व स्तुति से सामूहिक मंगलाचरण किया। राजराजेश्वरी नगर के सभाध्यक्ष राकेश जी छाजेड़ एवं विजयनगर सभा के अध्यक्ष मंगल जी कोचर ने अपने विचार व्यक्त किए।
संचालन: कार्यक्रम का संचालन सभा मंत्री गुलाब बाँठिया ने किया और आभार ज्ञापन तेयुप अध्यक्ष विक्रम महेर ने किया। दोनों स्थानों पर साध्वी श्री जी के मंगलपाठ से कार्यक्रमों का समापन हुआ।
