तप की अग्नि से आत्मा बनती है कंचन, आंचल बैद के मासखमण तप का हुआ भव्य अभिनंदन


बीकानेर,4 दिसम्बर । जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा गंगाशहर के तत्वावधान में रविवार को एक आध्यात्मिक गरिमापूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। उग्र विहारी तपोमूर्ति मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी के पावन सान्निध्य में सुश्री आंचल बैद द्वारा की गई ‘मासखमण’ तपस्या का भव्य अभिनंदन समारोह तेरापंथ भवन में संपन्न हुआ।


इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि जिस प्रकार सोने और चांदी की शुद्धता परखने के लिए उन्हें अग्नि में तपाया जाता है, ठीक उसी प्रकार तप की अग्नि आत्मा को कर्मों के मैल से मुक्त कर निर्मल और पवित्र बनाती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि तपस्या का सिद्धांत अत्यंत व्यापक है, जो हमें मन, वचन और काया के संयम का मार्ग दिखाता है।


उन्होंने कहा कि तपस्या का सिद्धांत बहुत व्यापक है उदार दृष्टिकोण से प्रतिपादित हुआ है तपस्या का सिद्धांत कहा गया है तुम शरीर वाणी और मन इन तीनों का प्रवर्तन करो तो ऐसा करो कि तुम्हारा शोधन हो जाए। इनका निवर्तन ऐसा करो कि तुम्हारा संवरण हो जाए।
आहार का विवेक ही तपस्या का पहला पाठ
मुनि श्री ने जीवनचर्या के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजन, गमन और इंद्रियों का उपयोग जीवन की अनिवार्यता है, लेकिन इनका सम्यक (सही) प्रवर्तन ही वास्तविक तप है। उन्होंने कहा, “आहार का विवेक व्यक्ति को स्वस्थ भी रख सकता है और रुग्ण भी बना सकता है। सही आहार अहिंसा की ओर ले जाता है। बड़ी तपस्या न केवल शरीर को साधती है, बल्कि आत्मा को हल्का बनाकर उसे ऊर्ध्वगामी (मोक्ष की ओर) ले जाती है।” इस मंगल अवसर पर मुनि श्री ने तप की अनुमोदना में अपने द्वारा रचित एक सुमधुर गीतिका का संगान भी किया।

साध्वी प्रमुखा जी का संदेश और सम्मान
कार्यक्रम के दौरान साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी द्वारा प्राप्त विशेष संदेश का वाचन जैन लूणकरण छाजेड़ ने किया। तेरापंथी सभा गंगाशहर की ओर से पूर्व अध्यक्ष अमर चन्द सोनी ने तपस्विनी की अनुमोदना की , परिवार की ओर से आंचल की माता प्रभा देवी बैद और दादा संतोष कुमार बैद ने मुनि श्री के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए तपस्या की अनुमोदना की।
साहित्य और पताका से तपस्विनी का अभिनंदन
तपस्या की इस कठिन साधना के सम्मान में तेरापंथी सभा और महिला मंडल की ओर से आंचल बैद का ‘साहित्य पताका’ पहनाकर अभिनंदन किया गया। इस दौरान श्रीमती प्रेम बोथरा, भावना छाजेड़, उषा डाकलिया, सुप्रिया राखेचा और जूली बैद सहित अनेक महिला कार्यकर्ताओं ने तपस्विनी का उत्साहवर्धन किया तथा साध्वी प्रमुखा जी के सन्देश को भेंट किया ।
कार्यक्रम का संचालन और व्यवस्थाओं का विवरण सभा के मंत्री जतनलाल संचेती ने प्रस्तुत किया। इस आध्यात्मिक समागम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे, जिन्होंने तपस्विनी के प्रति अपने हर्ष और भाव अभिव्यक्त किए।








