बीकानेर में बजट पूर्व बैठक में मंत्रालयिक कर्मचारियों ने उठाई आवाज; ग्रेड-पे 3600 और स्वतंत्र निदेशालय की मांग


बीकानेर, 9 जनवरी । राजस्थान के आगामी बजट को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को आयोजित महत्वपूर्ण बजट पूर्व (Pre-Budget) बैठक में मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है। अखिल राजस्थान बाबू एकता मंच और शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने ईमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्य सचिव सहित वित्त व कार्मिक विभाग के उच्चाधिकारियों को अपना मांग पत्र प्रेषित किया है। इन प्रस्तावों में मंत्रालयिक संवर्ग के सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर दिया गया है।


अखिल राजस्थान बाबू एकता मंच के प्रदेश संयोजक और शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने बताया कि संगठन की सबसे प्रमुख मांग ‘स्टेट पैरिटी’ (State Parity) के आधार पर कनिष्ठ सहायकों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक करने और उनकी ग्रेड-पे को बढ़ाकर 3600 रुपये करने की है। इसके साथ ही, मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए एक अलग ‘मंत्रालयिक निदेशालय’ के गठन और राजस्थान मंत्रालयिक सेवा नियम कैडर घोषित करने की मांग भी बजट प्रस्तावों में शामिल की गई है। प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए ग्रेड-पे 8700 में ‘उपनिदेशक (प्रशासनिक)’ का नया पद सृजित करने का भी सुझाव दिया गया है।


शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने अपने ज्ञापन में ‘छात्र हित’ को सर्वोपरि रखते हुए एक बड़ा सुझाव दिया है। संघ ने मांग की है कि शैक्षणिक पदों (अध्यापक, व्याख्याता, प्रधानाचार्य आदि) पर कार्यरत जो कार्मिक वर्तमान में प्रशासनिक कार्यालयों में लगे हुए हैं, उन्हें वहां से हटाकर शिक्षण संस्थाओं में भेजा जाए ताकि पठन-पाठन सुचारू हो सके। इसके अलावा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (CDEO) कार्यालयों की उपयोगिता पर पुनर्विचार करने और विद्यालयों के निरीक्षण दल में मंत्रालयिक अधिकारियों को भी शामिल करने की वकालत की गई है।
संगठन ने स्कूलों के प्रशासनिक कार्यभार को देखते हुए पीईईओ (PEEO) और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के सेटअप में भी बदलाव की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक उच्च माध्यमिक विद्यालय में न्यूनतम एक अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी, एक सहायक प्रशासनिक अधिकारी, एक वरिष्ठ सहायक और दो कनिष्ठ सहायकों के पद स्वीकृत किए जाने चाहिए। साथ ही, शिक्षकों की तर्ज पर मंत्रालयिक कर्मचारियों के लिए भी प्रतिवर्ष दो दिवसीय ‘मंत्रालयिक सम्मेलन’ आयोजित करने का प्रावधान बजट में रखने की पुरजोर मांग की गई है।








