मां की सेवा ही सच्ची परमात्मा भक्ति – गच्छाधिपति नित्यानंद सूरीश्वरजी


- बीकानेर में ‘मातृवंदना’ की भावपूर्ण सरिता
बीकानेर, 15 जनवरी। बीकानेर की धरा पर गुरुवार को आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला। जैन श्वेताम्बर तपागच्छ के गच्छाधिपति और पद्मश्री से सम्मानित आचार्यश्री विजय नित्यानंद सूरीश्वरजी के पावन सान्निध्य में मातृवंदना, भूमि पूजन और ऐतिहासिक मार्ग के लोकार्पण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुए।


गंगाशहर मार्ग स्थित पार्श्वचन्द्र सूरीश्वरजी की दादाबाड़ी में आयोजित ‘मातृवंदना’ कार्यक्रम में गच्छाधिपति ने मां की महिमा का बखान करते हुए कहा कि “मां के बिना महात्मा बनना और परमात्मा से मिलना असंभव है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि माता-पिता के आशीर्वाद के बिना धर्म और गुरु की सच्ची साधना संभव नहीं है। माउंट आबू की प्रसिद्ध कलाकार भावना आचार्य ने अपनी भजनों और मर्मस्पर्शी प्रसंगों के माध्यम से उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को भाव-विभोर कर दिया। मुनि मुक्तानंद विजय ने भी माता-पिता को संतान का सबसे बड़ा हितचिंतक बताया।


स्वतंत्रता सेनानी रावतमल कोचर मार्ग का हुआ लोकार्पण
आर्य समाज भवन के पास आयोजित एक अन्य गरिमामयी समारोह में गच्छाधिपति एवं बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ एडवोकेट और पूर्व यूआईटी चेयरमैन स्वर्गीय रावतमल कोचर के नाम से मार्ग का लोकार्पण किया। आचार्यश्री ने स्वर्गीय कोचर के 58 साल पुराने संस्मरण साझा करते हुए उन्हें त्याग और सेवा की प्रतिमूर्ति बताया।
विधायक व्यास ने इस अवसर पर क्षेत्र में सड़क निर्माण और विकास कार्यों के लिए स्वीकृतियों की घोषणा की और कहा कि यह मार्ग आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक एकता की प्रेरणा देता रहेगा। कोचर फ्रेंड्स क्लब के जितेंद्र व कुणाल कोचर ने बताया कि स्वर्गीय कोचर ने 1924 में सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए वाल्मीकि समाज के बच्चों के लिए शिक्षा की अलख जगाई थी।
कार्यकम में पूर्व मंत्री डॉ.बुलाकी दास कल्ला सहित जैन अजैन समाज के गणमान्य नागरिक व बड़ी संख्या में श्राविकाएं मौजूद थी। कार्यक्रम संयोजक सुरेन्द्र बद्धाणी जैन परिवार की ओर से कलाकार का सम्मान किया गया।








