कृषि विवि में ‘समन्वित कृषि’ पर जोर, कुलगुरु डॉ. दुबे ने किया मॉडल यूनिट का निरीक्षण
कृषि विवि में 'समन्वित कृषि' पर जोर, कुलगुरु डॉ. दुबे ने किया मॉडल यूनिट का निरीक्षण


बीकानेर, 24 जनवरी। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र बाबू दुबे ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित ‘समन्वित कृषि प्रणाली इकाई’ (Integrated Farming System Unit) का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों को निर्देश दिए कि इस यूनिट को किसानों के लिए एक ‘आदर्श मॉडल’ के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि प्रदेश का किसान अपनी आय को दोगुना करने के गुर सीख सके।


खेती के साथ पशुपालन: आय बढ़ाने का मंत्र
निरीक्षण के दौरान कुलगुरु डॉ. दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। समन्वित कृषि (Integrated Farming) आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसके माध्यम से किसान खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को एक ही स्थान पर अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि इस इकाई में किसानों के नियमित भ्रमण (Field Visits) आयोजित किए जाएं ताकि वे यहां की गतिविधियों से प्रेरित होकर इस मॉडल को अपने खेतों पर लागू कर सकें।


उन्नत नस्लें और आधुनिक तकनीकें आकर्षण का केंद्र
प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. दीपाली धवन ने कुलगुरु को यूनिट में संचालित विभिन्न प्रकल्पों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:
बकरी पालन: इकाई में उन्नत ‘सिरोही नस्ल’ की बकरियां और मेमने रखे गए हैं।
भेड़ पालन: यहां भेड़ों की भी उन्नत किस्मों का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है।
अजोला व वर्मीकंपोस्ट: जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अजोला फर्न यूनिट और वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) उत्पादन की प्रक्रिया सतत रूप से संचालित है।
साफ-सफाई और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान के निर्देश
कुलगुरु ने मुर्गी पालन इकाई और चारा उत्पादन क्षेत्रों का भी जायजा लिया। उन्होंने पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित देख-रेख और पूरी यूनिट में समुचित साफ-सफाई बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए। डॉ. दुबे ने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय की तकनीकें केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहकर सीधे किसान के खेत तक पहुँचनी चाहिए।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. पी.के. यादव, केवीके बीकानेर प्रभारी डॉ. दुर्गा शंकर, डॉ. मदन लाल रेगर सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। वैज्ञानिकों ने कुलगुरु को आश्वस्त किया कि आगामी महीनों में अधिक से अधिक किसान समूहों को इस इकाई का भ्रमण करवाकर जागरूक किया जाएगा।
