हाथी-घोड़ों के साथ निकला भव्य वरघोड़ा, आज 15 प्रतिमाओं की होगी अंजन शलाका

हाथी-घोड़ों के साथ निकला भव्य वरघोड़ा
shreecreates
quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 7 फरवरी। गंगाशहर के 177 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक श्री सांवलिया पार्श्वनाथ जिनालय (गोल मंदिर) में चल रहे पंचाह्निका महोत्सव के चौथे दिन शनिवार को भक्ति और वैभव का अनूठा संगम देखने को मिला। खरतरगच्छाधिपति आचार्यश्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी महाराज के पावन सानिध्य में भव्य ‘वरघोड़ा’ (रथ-शोभायात्रा) निकाला गया। इस दौरान समूचा मार्ग जय जिनेन्द्र के उद्घोष से गुंजायमान रहा और श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के दीक्षा कल्याणक की सजीव लीला का आनंद लिया।

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

शाही लवाजमे के साथ निकला वरघोड़ा
ट्रस्ट अध्यक्ष धनपत सिंह बांठिया ने बताया कि शोभायात्रा बांठिया चौक से शुरू होकर प्रमुख बाजारों से होती हुई जिनालय पहुँची। वरघोड़े का दृश्य अत्यंत मनमोहक था:

pop ronak

शाही सवारी: महोत्सव के ‘राजा’ बने नई दिल्ली के पुलिस कमिश्नर राजा बांठिया और नीशू बांठिया सजे-धजे हाथी पर सवार होकर प्रभावना कर रहे थे।

बग्गियां और ध्वज: पाँच बग्गियों पर उत्सव के विभिन्न पात्र सवार थे, वहीं ऊंटों और घोड़ों पर श्रावक पंचरंगी जैन ध्वज थामे चल रहे थे।

एकता का परिधान: फौजराज बांठिया परिवार के करीब 250 सदस्य एक जैसे पारंपरिक कुर्ता-पजामा और साड़ियों में मंगल गीत गाते हुए चल रहे थे।

स्वागत सत्कार: इंदौर के कलाकार मोहित शर्मा ने मार्ग में 25 स्थानों पर आकर्षक रंगोली बनाई। जगह-जगह शर्बत, पेयजल और राबड़ी से श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

वाराणसी नगरी में गूंजे वैराग्य के स्वर
तेरापंथ भवन में निर्मित ‘वाराणसी नगरी’ में भगवान पार्श्वनाथ का दीक्षा कल्याणक विधान संपन्न हुआ। मुम्बई के संगीतकार नरेंद्र भाई वाणीगोता के भजनों पर श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे। इस अवसर पर आचार्यश्री जिनमणिप्रभ सूरिश्वरजी ने अपने प्रवचन में कहा:

“भगवती दीक्षा के बिना केवल्य ज्ञान और निर्वाण संभव नहीं है। असली सुख भौतिक पदार्थों में नहीं, बल्कि आत्म-परमात्म की भक्ति में है। प्रतिपल बदलती इस काया और संसार के मोह को त्यागकर आत्मानंद की प्राप्ति का पुरुषार्थ करना ही श्रेष्ठ है।”

साध्वीवृंद की विशेष उपस्थिति
इस महोत्सव में लंबे समय बाद वयोवृद्ध साध्वीश्री पदम प्रभा जी और सुव्रताश्री जी (पार्श्वचन्द्र गच्छ) शामिल होने पहुँचीं, जो वर्तमान में रामपुरिया उपासरे में प्रवास कर रही हैं। उनके साथ बीकानेर मूल की साध्वी दीपमाला जी और शंखनिधि श्रीजी ने भी वरघोड़े में भागीदारी कर श्रावकों को हर्षित किया।

आज का मुख्य आकर्षण: अंजन शलाका व प्रतिष्ठा
महोत्सव के पांचवें दिन, रविवार (8 फरवरी) को मंगल मुहूर्त में श्री सांवलिया पार्श्वनाथ मंदिर की 13 नूतन प्रतिमाओं सहित कुल 15 प्रतिमाओं की अंजन शलाका और प्रतिष्ठा विधि विधान से संपन्न होगी। इसके अतिरिक्त देश-प्रदेश के विभिन्न जिनालयों के लिए लाई गई 21 प्रतिमाओं का भी अंजन विधान होगा। दोपहर में अष्टोत्तरी शांति स्नात्र महापूजन होगा और 9 फरवरी की सुबह जिनालय के द्वारों का भव्य उद्घाटन किया जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *