बीकानेर में 5 अप्रैल से पूर्ण नहरबंदी, 30 दिन जलाशयों के भरोसे रहेगा शहर
बीकानेर में 5 अप्रैल से पूर्ण नहरबंदी, 30 दिन जलाशयों के भरोसे रहेगा शहर


गर्मी की आहट के साथ जल संकट की चेतावनी


बीकानेर, 23 फरवरी। बीकानेर के निवासियों के लिए आने वाले महीने जल प्रबंधन की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं। 21 मार्च से शुरू हो रही इंदिरा गांधी नहर (IGNP) की बंदी ने शहर में भीषण गर्मी के बीच जल संकट की आशंका बढ़ा दी है। पंजाब सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मरम्मत कार्यों के चलते नहर में पानी का प्रवाह बंद रहेगा, जिसका सीधा असर बीकानेर की पेयजल व्यवस्था पर पड़ेगा।


5 अप्रैल से ‘शून्य’ होगी नहर सप्लाई
इंदिरा गांधी नहर के मुख्य अभियंता विवेक गोयल ने स्पष्ट किया है कि बंदी के शुरुआती दौर (21 मार्च से 4 अप्रैल) में केवल पेयजल के लिए पानी छोड़ा जाएगा, जबकि सिंचाई का पानी पहले दिन से ही बंद कर दिया जाएगा।
पूर्ण बंदी: 5 अप्रैल से पेयजल के लिए मिलने वाली सप्लाई भी पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।
समय सीमा: इसके बाद अगले 30 दिनों तक शहर को पूरी तरह से स्थानीय जलाशयों (रिजर्वायर) पर निर्भर रहना होगा।
‘ओड-इवन’ और एक दिन छोड़कर सप्लाई की तैयारी
नहरबंदी के दौरान जलदाय विभाग (PHED) शहर में पानी की किल्लत को रोकने के लिए नया टाइम टेबल लागू करने जा रहा है।
वैकल्पिक आपूर्ति: शोभासर और बीछवाल जलाशयों में पानी का भंडारण किया जा रहा है। संभावना है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में दो दिन में एक बार या ‘ओड-इवन’ फार्मूले के तहत जलापूर्ति की जाए।
भंडारण क्षमता: बीछवाल जलाशय में करीब 2500 मीट्रिक लीटर पानी एकत्र करने की क्षमता है, लेकिन जलाशयों में जमी मिट्टी (Silt) के कारण उनकी वास्तविक क्षमता प्रभावित हो सकती है। विभाग ने वर्तमान में ही सप्लाई की मात्रा में कटौती शुरू कर दी है।
मरम्मत कार्यों के लिए पंजाब ने जारी किया बजट
यह बंदी नहरों के सुदृढ़ीकरण और मोघों की मरम्मत के लिए की जा रही है। राजस्थान और पंजाब की सरकारों ने इसके लिए विशेष बजट आवंटित किया है। मुख्य नहर से लेकर वितरिकाओं तक की मरम्मत का कार्य इस एक माह की अवधि में युद्धस्तर पर किया जाएगा।
आमजन को सलाह और कच्ची बस्तियों की चिंता
नहरबंदी का सबसे गहरा प्रभाव कच्ची बस्तियों और शहर के टेल (अंतिम छोर) पर स्थित मोहल्लों पर पड़ने की आशंका है। जलदाय विभाग ने शहरवासियों से अपील की है कि:
- पानी का संचय विवेकपूर्ण तरीके से करें।
- कूलर, बागवानी और वाहनों की धुलाई में पेयजल का दुरुपयोग न करें।
- प्रशासन द्वारा जारी नए सप्लाई समय का पालन करें।
