एनजीटी के आदेशों की पालना में सील होंगे ट्यूबवेल, कटेंगे बिजली कनेक्शन
अवैध भूजल दोहन की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित


- अवैध भूजल दोहन की रोकथाम के लिए जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक आयोजित
बीकानेर, 23 फरवरी। जिले में बेतरतीब और अवैध रूप से हो रहे भूजल दोहन को रोकने के लिए सोमवार को जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। कलेक्ट्रेट सभागार में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (नगर) रमेश देव एवं उपखंड अधिकारी महिमा कसाना की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में बिना अनुमति चल रहे जल स्रोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए।


एनजीटी के आदेशों की पालना: सीलिंग और बिजली कटौती के निर्देश
बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की केंद्रीय बेंच, भोपाल के आदेशों का हवाला देते हुए अवैध भूजल निकासी पर अंकुश लगाने की रणनीति तैयार की गई।
राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) को निर्देशित किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित ट्यूबवेल और बोरवेल को तुरंत सील किया जाए।


विद्युत विच्छेद: अवैध जल निकासी संरचनाओं के बिजली कनेक्शन तत्काल प्रभाव से काटने के लिए विद्युत विभाग को पाबंद किया गया है।
नए कनेक्शनों के लिए शपथ पत्र होगा अनिवार्य
भविष्य में अवैध दोहन को रोकने के लिए प्रशासन ने नई गाइडलाइन जारी की है।
अनिवार्य अनुमति: अब औद्योगिक इकाइयों को नया विद्युत कनेक्शन लेते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अवैध भूजल दोहन नहीं करेंगे।
शपथ पत्र: उद्यमियों को संबंधित विभाग से भूजल आपूर्ति की वैध अनुमति प्राप्त करनी होगी और अनिवार्य रूप से एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इसके बिना बिजली कनेक्शन जारी नहीं किए जाएंगे।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत होगी जेल और जुर्माना
अतिरिक्त जिला कलेक्टर रमेश देव ने जिले के समस्त उपखण्ड अधिकारियों और प्रभारी अधिकारियों को निरंतर निगरानी और प्रवर्तन कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए।
कठोर प्रावधान: नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 से 21 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इन प्रावधानों के तहत भारी जुर्माने के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है।
बैठक में भूजल विभाग, जिला उद्योग केंद्र, पीएचईडी (PHED) और रीको सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सख्ती से औद्योगिक क्षेत्रों में बिना एनओसी (NOC) पानी निकाल रहे संस्थानों में हड़कंप मचा हुआ है।
