लालेश्वर महादेव मंदिर में साध्वी ऋतंभरा ने की पूजा-अर्चना और कहा “हृदय में प्रवेश करने की कला सिखाती है सनातन संस्कृति
लालेश्वर महादेव मंदिर में साध्वी ऋतंभरा ने की पूजा-अर्चना और कहा "हृदय में प्रवेश करने की कला सिखाती है सनातन संस्कृति


- शिवबाड़ी में उमड़ा आस्था का सैलाब
बीकानेर, 27 फरवरी। बीकानेर की आध्यात्मिक धरा शिवबाड़ी स्थित श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर (शिवमठ) में शुक्रवार सायंकाल उस समय भक्ति का ज्वार उमड़ पड़ा, जब वात्सल्य मूर्ति परम पूज्या साध्वी दीदी माँ ऋतंभरा का पावन आगमन हुआ। मंदिर प्रांगण में दीदी माँ का भव्य स्वागत किया गया, जहाँ उन्होंने भगवान लालेश्वर महादेव के दर्शन कर विश्व कल्याण की कामना की।


महादेव की आराधना और संवित् साहित्य का अर्पण
आगमन के पश्चात दीदी माँ ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया। यहाँ उन्होंने मंदिर अधिष्ठाता पूज्य स्वामी श्री विमर्शानंदगिरिजी महाराज, पुजारी श्यामसुंदर पारीक और गणेश मिश्रा के सान्निध्य में भगवान् श्रीलालेश्वर महादेव का विधिवत जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की। सम्मान: इस दिव्य अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज एवं प्रन्यास के कार्यकर्ताओं ने दीदी माँ को स्मृति स्वरूप भगवान लालेश्वर महादेव का चित्र एवं संवित् साहित्य भेंट किया। स्वामी जी का संदेश: स्वामी विमर्शानंदगिरिजी ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में संतों का परिश्रम वंदनीय है। दीदी माँ के चरणों का यहाँ पड़ना बीकानेर के लिए सौभाग्य का विषय है।


दीदी माँ का बोधवाक्य: “ताला और चाबी का दर्शन”
पूजा के उपरांत उपस्थित सैकड़ों भक्तों को संबोधित करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने जीवन के गूढ़ दर्शन को एक सरल उदाहरण के माध्यम से समझाया।
मार्मिक उदाहरण: उन्होंने कहा, “ताला कठोर होता है, वह बांध देता है, लेकिन चाबी सूक्ष्म होती है और बीज की तरह हृदय में प्रवेश कर जाती है। सनातन संस्कृति हमें कठोर ताला नहीं, बल्कि वह चाबी बनना सिखाती है जो हर मानव के हृदय में प्रवेश कर सके।”
अद्वैत परंपरा: उन्होंने भक्तों को अद्वैत परंपरा से जुड़े रहने के महत्व को समझाया और कहा कि संतों का एकमात्र कार्य धर्म और सनातन का अविरल प्रचार-प्रसार करना है।
भागवत कथा के उपलक्ष्य में दौरा
मानव प्रबोधन प्रन्यास के विजेन्द्र सिंह भाटी ने जानकारी दी कि पूज्य साध्वी माँ इन दिनों बीकानेर में श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य आयोजन कर रही हैं। इसी क्रम में वे आज आश्रम और मंदिर के दर्शन हेतु पधारीं।
इस गरिमामय आयोजन में बजरंगलाल शर्मा, सुशील यादव, गिरधारी सिंह तंवर, राजकुमार कौशिक, हरीशचंद्र शर्मा, भवानीशंकर व्यास, हरिओम् पुंज, रमेश शर्मा, रमेश जोशी सहित प्रन्यास के समस्त कार्यकर्ताओं का सक्रिय सहयोग रहा। देर शाम तक मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “जय श्री राम” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
