मानवता का सुरक्षा कवच है अणुव्रत’- साध्वी सोमयशा

मानवता का सुरक्षा कवच है अणुव्रत'- साध्वी सोमयशा
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चेन्नई , 4 मार्च। चेन्नई के कोला सरस्वती विद्यालय में अणुविभा के तत्वावधान और अणुव्रत समिति के संयोजन में 78वां अणुव्रत स्थापना दिवस अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। साध्वी श्री सोमयशा जी और साध्वी श्री उदितयशा जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने मानवीय मूल्यों और चारित्रिक उत्थान का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत अणुव्रत रैली और ध्वजारोहण के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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मुख्य प्रवचन में साध्वी श्री सोमयशा जी ने अणुव्रत की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति सदैव व्रत और त्याग प्रधान रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक नियम जहाँ बाहरी जगत को प्रभावित करते हैं, वहीं आध्यात्मिक व्रत अंतरात्मा की चेतना का ऊर्ध्वारोहण करते हैं। साध्वी जी ने जोर देकर कहा कि अणुव्रत के छोटे-छोटे नियम व्यक्ति के जीवन को विकासोन्मुखी बनाते हैं। उन्होंने वर्ष 1949 में आचार्य श्री तुलसी द्वारा शुरू किए गए इस असांप्रदायिक आंदोलन को मानवता के उत्थान के लिए एक मील का पत्थर बताया।

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साध्वी श्री उदितयशा जी ने आचार्य श्री तुलसी की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए उन्हें एक महान दृष्टा बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शरीर आत्मा का आवरण है, उसी प्रकार ‘व्रत’ जीवन का सुरक्षा कवच है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री बी.एल. आच्छा ने अपने संबोधन में कहा कि अणुव्रत केवल एक संकल्प मात्र नहीं है, बल्कि यह जीवन की गहरी आस्था है। उन्होंने आचार्य तुलसी के विचारों को आधुनिक समय की आवश्यकता बताते हुए साधनों की शुद्धता और विचारों की स्वतंत्रता पर बल दिया।

समारोह के दौरान अणुव्रत की 77 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को दर्शाती एक भव्य चित्र प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसकी सभी आगंतुकों ने सराहना की। कार्यक्रम में श्री गौतमचन्द जी सेठिया ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन करवाया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने संकल्प के साथ दोहराया। समिति की अध्यक्षा श्रीमती सुभद्रा लुणावत ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि मंत्री श्री कुशल बांठिया ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन उपाध्यक्ष श्री स्वरुप चन्द दाँती द्वारा किया गया।

 

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