टारगेट पूरा करने के चक्कर में यात्रियों से भरी बस को किया जब्त, केनुला लगे मरीज और बुजुर्गों ने आरटीओ दफ्तर में काटा घंटों वक्त

टारगेट पूरा करने के चक्कर में यात्रियों से भरी बस को किया जब्त
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  • परिवहन विभाग की तानाशाही

बीकानेर, 6 मार्च । वित्तीय वर्ष की समाप्ति के करीब आते ही परिवहन विभाग बीकानेर के निरीक्षकों पर ‘लक्ष्य पूर्ति’ का भूत इस कदर सवार है कि उन्हें आम जनता की तकलीफें भी नजर नहीं आ रही हैं। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे बीकानेर से लूणकरणसर मार्ग पर चलने वाली एक निजी बस को परिवहन निरीक्षक संतोष कुमार ने सवारियों सहित जब्त कर बीछवाल स्थित आरटीओ कार्यालय में खड़ा कर दिया। विभाग की इस कार्रवाई से बस में सवार दर्जनों यात्रियों को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

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बीमार और बुजुर्ग यात्रियों की अनसुनी
बस में सवार यात्रियों ने बताया कि उनमें कई ऐसे मरीज थे जो बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से इलाज कराकर लौट रहे थे। एक महिला यात्री के हाथ में केनुला लगा था और शरीर पर प्लास्टर बंधा हुआ था। यात्रियों ने अधिकारियों से मिन्नतें कीं कि उन्हें रास्ते में ही उतार दिया जाए ताकि वे अपने गंतव्य तक पहुँच सकें, लेकिन अधिकारियों ने एक न सुनी। महिला यात्री ने आपबीती सुनाते हुए कहा, “मुझे बार-बार चक्कर आ रहे थे, लेकिन अधिकारियों को रहम नहीं आया। उन्होंने हमें बस समेत कार्यालय में बंद कर दिया।”

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सवारियों ने किया डीटीओ का घेराव
घंटों तक प्यास और भूख से तड़प रहे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का सब्र जब जवाब दे गया, तो उन्होंने जिला परिवहन अधिकारी (DTO) का घेराव कर दिया। यात्रियों की मांग थी कि बस का चालान काटकर उसे छोड़ दिया जाए ताकि वे घर पहुँच सकें। हालांकि, अधिकारियों के अड़ियल रवैये के कारण डेढ़ घंटे तक कोई समाधान नहीं निकला। काफी विरोध के बाद विभाग ने दूसरी बस की व्यवस्था कर यात्रियों को रवाना किया, लेकिन तब तक कई यात्री अपना भारी सामान उठाकर पैदल ही मुख्य सड़क की ओर निकल चुके थे।

कानून का उल्लंघन: वकीलों ने की कड़ी निंदा
बीकानेर के प्रबुद्ध नागरिकों और अधिवक्ताओं ने परिवहन विभाग के इस व्यवहार की तीखी आलोचना की है। एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा, बनवारी लाल और कैलाश सियाग ने बताया कि नियमानुसार यात्री वाहन को जब्त करने से पहले यात्रियों के लिए वैकल्पिक साधन की व्यवस्था करना अनिवार्य है। यदि वाहन में सवारियां मौजूद हैं, तो उसे जब्त करने के बजाय चालान बनाकर जुर्माना वसूला जाना चाहिए। वकीलों ने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है।

 

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