पहाड़ सा दुख, फिर भी सीने में जीत की आग: पारिवारिक त्रासदी के बीच इस खिलाडी ने भारत को बनाया वर्ल्ड चैंपियन

पारिवारिक त्रासदी के बीच इस खिलाडी ने भारत को बनाया वर्ल्ड चैंपियन
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इस स्टार के खिलाड़ी पर टूटा दुखों का पहाड़, हादसे में बहिन और जीजा की मौत के बावजूद फाइनल में ठोका तूफानी अर्धशतक

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अहमदाबाद, 9 मार्च । क्रिकेट के मैदान पर जब कोई खिलाड़ी चौके-छक्के लगाता है, तो दुनिया उसकी चमक देखती है, लेकिन उस चमक के पीछे छिपे आंसुओं की खबर कम ही लोगों को होती है। भारत की टी-20 वर्ल्ड कप जीत के हीरो रहे ईशान किशन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल मुकाबले में जब वे 25 गेंदों पर 54 रनों की आतिशी पारी खेल रहे थे, तब वे अपने जीवन के सबसे कठिन व्यक्तिगत दौर से गुजर रहे थे।

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फाइनल से पहले कार हादसे में खोए बहन और जीजा
टीओआई की रिपोर्ट और पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को एक भीषण कार हादसे में ईशान किशन की चचेरी बहन और जीजा की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस खबर ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। ईशान के पिता प्रणव पांडे ने भरे गले से बताया कि परिवार गहरे सदमे में है और इसी त्रासदी के कारण वे खुद भी बेटे का फाइनल मैच देखने अहमदाबाद नहीं जा सके।

मैदान छोड़ना चाहते थे ईशान, साथियों ने संभाला
हादसे की खबर मिलते ही ईशान बुरी तरह टूट गए थे और तुरंत अपने परिवार के पास पहुंचना चाहते थे। प्रैक्टिस सेशन के दौरान उनकी ऊर्जा पूरी तरह खत्म नजर आ रही थी। हालांकि, साथी खिलाड़ियों और टीम मैनेजमेंट ने उनके दुःख को साझा किया और उन्हें ढांढस बंधाया। ‘नेशनल ड्यूटी’ के महत्व को समझते हुए ईशान ने मैदान पर उतरने का हौसला जुटाया।

आसमान की ओर बल्ला उठाकर दी श्रद्धांजलि
मैच के दौरान ईशान का प्रदर्शन कहीं से भी विचलित नजर नहीं आया। उन्होंने नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते हुए तूफानी अर्धशतक जड़ा और फील्डिंग में दो शानदार कैच भी लपके।

भावुक पल: अर्धशतक पूरा करने के बाद ईशान ने अपना बल्ला आसमान की ओर उठाकर दिवंगत आत्माओं को याद किया, जो पूरे स्टेडियम के लिए एक भावुक क्षण था।

शानदार रिकॉर्ड: ईशान 9 पारियों में 317 रन बनाकर टूर्नामेंट के चौथे सबसे सफल बल्लेबाज रहे।

ईशान किशन का यह जज्बा साबित करता है कि खिलाड़ी केवल कौशल से नहीं, बल्कि फौलादी इरादों से बनता है। दुख के सागर में डूबे होने के बावजूद उन्होंने देश को विश्व विजेता बनाने की अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखा।

 

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