बीकानेर के जांबाज युवाओं का ‘साहसिक मिशन, 13,200 फीट की ऊंचाई पर शिपकी ला (भारत-तिब्बत सीमा) पहुंचे पार्थ और महिपाल

बीकानेर के जांबाज युवाओं का 'साहसिक मिशन'
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बीकानेर, 10 मार्च । बीकानेर की रेतीली धरती के दो साहसी युवकों ने हिमालय की दुर्गम चोटियों और शून्य से नीचे के तापमान को चुनौती देते हुए अपनी जांबाजी का परिचय दिया है। बीकानेर के पार्थ मंगल और महिपाल सिंह इंदा ने शुक्रवार शाम अपनी बाइक यात्रा शुरू की और चंडीगढ़, नारकंडा, सांगला तथा रिकांग पियो जैसे कठिन रास्तों को पार करते हुए 13,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित शिपकी ला (Shipki La) चौकी पर तिरंगा फहराया।

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एडवेंचर फाउंडेशन के सचिव आर. के. शर्मा ने इस साहसिक यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि इन युवाओं ने अब तक लगभग 1100 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और भारतीय सेना के जवानों के बीच पहुंचकर इन जांबाजों ने न केवल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था को देखा, बल्कि दुर्गम परिस्थितियों में तैनात जवानों के साथ अनुभव भी साझा किए।

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2600 किमी का लक्ष्य: अब स्पीति की ओर बढ़ते कदम
शिपकी ला की बर्फीली हवाओं और कम ऑक्सीजन के स्तर के बावजूद इन युवाओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। दोनों युवक अब हिमाचल प्रदेश की प्रसिद्ध स्पीति घाटी (Spiti Valley) की ओर बढ़ रहे हैं। यह यात्रा कुल 8 दिनों की होगी, जिसके दौरान वे लगभग 2600 किलोमीटर का सफर तय कर बीकानेर वापस लौटेंगे।

दुर्गम रास्तों पर ‘एडवेंचर’ का जुनून
बीकानेर के इन युवाओं की इस उपलब्धि ने जिले के एडवेंचर प्रेमियों में नया जोश भर दिया है। रिकांग पियो से आगे का रास्ता दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में शुमार किया जाता है, जहाँ एक ओर ऊंची पहाड़ियां और दूसरी ओर गहरी खाइयां हैं। पार्थ और महिपाल की यह यात्रा न केवल शारीरिक क्षमता का परीक्षण है, बल्कि बीकानेर के युवाओं की मानसिक दृढ़ता का भी प्रतीक है।

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