महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रचेता विजयलक्ष्मी जोशी हुईं रिटायर

महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रचेता विजयलक्ष्मी जोशी हुईं रिटायर
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  • 32 साल की सेवा के बाद विदाई पर भावुक हुईं, पति के योगदान को किया याद

बीकानेर, 2 नवंबर 2026। महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रचेता (Pracheta) के पद पर अपनी सेवाएं दे रहीं विजयलक्ष्मी जोशी शनिवार को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गईं। बीकानेर में 32 साल 18 दिन का लंबा और समर्पित सेवाकाल पूरा करने के बाद, रिटायरमेंट के इस विदाई अवसर पर वे अपने दिवंगत पति को याद कर भावुक हो गईं।

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पति का रहा सबसे बड़ा योगदान
अपनी सेवानिवृत्ति के पावन और भावुक क्षणों में विजयलक्ष्मी जोशी ने अपने दिवंगत पति को याद करते हुए साझा किया कि, “अगर वे नहीं होते तो शायद आज मेरी यह नौकरी भी नहीं होती। वे हमेशा मेरे साथ साए की तरह रहे। गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक मेरे साथ चले। हर मुश्किल में मेरा हौसला बने, हर परेशानी से लड़े और हर परिस्थिति में मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे। आज मैं जिस मुकाम पर पहुंची हूं, उसमें उनकी मेहनत, उनका विश्वास और उनका साथ सबसे बड़ा है।”

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सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की प्रणेता
अपने तीन दशक से अधिक के कार्यकाल के दौरान विजयलक्ष्मी जोशी ने न केवल सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा, बल्कि सामाजिक बदलाव में भी एक सक्रिय सहभागी की भूमिका निभाई। उनका कार्यक्षेत्र कार्यालय की चारदीवारी तक सीमित न रहकर दूर-दराज के गांवों और ढाणियों तक फैला रहा।

आंगनबाड़ी केंद्रों, आशा सहयोगिनियों और विभागीय साथियों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्होंने बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए अथक प्रयास किए। कई बार पारिवारिक और सामाजिक बाधाओं के बीच उन्होंने धैर्य और संवाद का परिचय देते हुए महिलाओं के परिवारों का विश्वास जीता और उन्हें स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया। उनके लिए यह नौकरी मात्र एक रोजगार नहीं, बल्कि महिलाओं को उनके सामर्थ्य का एहसास कराने का एक मिशन था।

कठिन परिस्थितियों में भी नहीं छोड़ी कर्तव्यनिष्ठा
जनवरी 2025 में उनके पति सुरेंद्र कुमार जोशी (निवासी जोशीवाड़ा, कोटगेट) का निधन हो गया था। इस गहरे मानसिक आघात के बाद विजयलक्ष्मी स्वयं गंभीर हृदय रोग की चपेट में आ गईं और उनकी धमनियों में ब्लॉकेज पाए जाने पर गुरुग्राम में उनकी जटिल बायपास सर्जरी हुई।

इतने बड़े स्वास्थ्य संकट और पारिवारिक दुखों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। स्वास्थ्य लाभ के बाद उन्होंने पुनः पूरी निष्ठा से ड्यूटी जॉइन की और अपने रिटायरमेंट के अंतिम कार्यदिवस तक पूरी मुस्तैदी से विभागीय कार्यों का निर्वहन किया।

प्रशासन द्वारा सराहा गया कार्य
अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने अपनी उत्कृष्ट कार्यक्षमता, फील्ड की गहरी समझ और प्रशासनिक दायित्वों के प्रति निष्ठा से विशेष पहचान बनाई। उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए जिले में पदस्थ रहे लगभग सभी जिला कलेक्टरों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है।

 

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