सृजन पथ के अनथक राही थे लक्ष्मीनारायण रंगा, स्मृति समारोह में साहित्यकारों ने दी भावांजलि

सृजन पथ के अनथक राही थे लक्ष्मीनारायण रंगा, स्मृति समारोह में साहित्यकारों ने दी भावांजलि
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बीकानेर, 10 मार्च । साहित्य, रंगकर्म और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में आयोजित तीन दिवसीय ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ समारोह का भव्य समापन हुआ। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में राजस्थान के ख्यातनाम साहित्यकारों और आलोचकों ने रंगा जी के विराट व्यक्तित्व और उनके 175 से अधिक पुस्तकों के विपुल सृजन को याद किया।

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समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात आलोचक डॉ. उमाकांत गुप्त ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन पथ के ऐसे राही थे जिन्होंने अपनी लेखनी से समकालीन जीवन बोध को गहराई से उकेरा। उन्होंने रंगा जी को आने वाली पीढ़ी के लिए ‘प्रकाश पुंज’ बताते हुए कहा कि उनके साहित्य में आर्ष ग्रंथों और उपनिषदों की प्रासंगिकता तर्काधारित है।

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साहित्यिक नवोन्मेष और बहुमुखी प्रतिभा के धनी
मुख्य अतिथि और वरिष्ठ कथाकार मालचंद तिवाड़ी ने रंगा जी के साहित्य को ‘नवोन्मेष’ (Innovation) की मिसाल बताया। उन्होंने विशेष रूप से रंगा जी के पौराणिक नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पात्रों की भाषा और घटनाओं का चित्रण आज के युग के अनुकूल और प्रेरक है।

विशिष्ट अतिथियों के विचार:

डॉ. मदन सैनी: रंगा जी केवल साहित्यकार नहीं, बल्कि संपादन, नृत्य, खेल और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों के अद्भुत ज्ञाता थे। उनका अनुभव संसार अत्यंत विराट था।

बुलाकी शर्मा: उन्होंने रंगा जी को विभिन्न कलाओं का ‘मौन साधक’ बताया, जो प्रचार-प्रसार से दूर रहकर निरंतर सृजन में लीन रहे।

कमल रंगा: वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने अपने पिता की लंबी सृजन-यात्रा के कई अनछुए और प्रेरक प्रसंग साझा किए।

शीघ्र अर्पित होगा ‘लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा-सम्मान’
समारोह के दौरान राजेश रंगा ने स्वागत उद्बोधन में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि जल्द ही साहित्य, रंगकर्म और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाली प्रतिभाओं को तीसरे वर्ष भी ‘राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा-सम्मान’ से नवाजा जाएगा।

शहर के गणमान्यों ने दी पुष्पांजलि
समारोह के अंतिम दिन बीकानेर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियों ने रंगा जी को अपनी भावांजलि अर्पित की। इनमें अविनाश व्यास, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, सुनील बोड़ा, डॉ. नरसिंह बिन्नाणी, कासिम बीकानेरी, और रामसहाय हर्ष सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमी और शिष्य उपस्थित रहे। मातृशक्ति की ओर से भी अंजू राव, हेमलता व्यास और राजेश्वरी व्यास सहित अनेक महिलाओं ने अपने प्रिय ‘बाऊजी’ को नमन किया।  समारोह का कुशल संचालन क़ासिम बीकानेरी और गिरिराज पारीक ने किया। अंत में वरिष्ठ रंगकर्मी रामसहाय हर्ष ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल एक व्यक्ति का स्मरण था, बल्कि बीकानेर की समृद्ध साहित्यिक विरासत का उत्सव भी रहा।

 

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