भारत के लिए टला ‘ऊर्जा संकट’, ईरान ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से भारतीय जहाजों को रास्ता देने पर सहमत

भारत के लिए टला 'ऊर्जा संकट', ईरान 'होर्मुज जलडमरूमध्य' से भारतीय जहाजों को रास्ता देने पर सहमत
quicjZaps 15 sept 2025

नई दिल्ली, 12 मार्च । पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच भारत ने एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक सफलता हासिल की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के प्रभावी हस्तक्षेप के बाद ईरान भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) से सुरक्षित रास्ता देने पर सहमत हो गया है।

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एस. जयशंकर की ‘टेलीफोनिक डिप्लोमेसी’ लाई रंग
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत के बाद यह सहमति बनी है। वर्तमान युद्ध के कारण इस समुद्री मार्ग पर वैश्विक ट्रैफिक 90% तक गिर गया है, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में भारत को मिली यह विशेष छूट देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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भारत की ‘ग्लोबल बैलेंसिंग एक्ट’
भारत ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी पकड़ मजबूत रखी है।

रूस और फ्रांस से संवाद: जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी विस्तृत चर्चा की है।

उद्देश्य: इस त्रिकोणीय संवाद का मुख्य लक्ष्य वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह ध्वस्त होने से बचाना और समुद्री व्यापारिक मार्गों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत खुला रखना है।

पश्चिमी देशों पर प्रतिबंध, भारत को विशेष छूट
ईरान का यह निर्णय वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। जहाँ ईरान ने अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों के जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं और उनके टैंकर विवादित क्षेत्र में फंसे हुए हैं, वहीं भारतीय जहाजों को “ग्रीन सिग्नल” मिलना भारत-ईरान के ऐतिहासिक और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की पुष्टि करता है।

 

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