हीमोफीलिया के प्रति सजगता ही बचाव, बीकानेर में आयोजित जागरूकता शिविर में विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण परामर्श

हीमोफीलिया के प्रति सजगता ही बचाव
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 18 मार्च । हीमोफीलिया सोसायटी, बीकानेर चैप्टर के तत्वावधान में बुधवार को समता नगर स्थित शगुन पैलेस में हीमोफीलिक सदस्यों और उनके परिवारों के लिए एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य उद्देश्य इस आनुवंशिक बीमारी के प्रति भ्रांतियों को दूर करना और रोगियों को उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देना था।

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आनुवंशिक रोग और उसके घातक लक्षण
पीबीएम अस्पताल के शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जी.एस. तंवर ने मुख्य वक्ता के रूप में बताया कि हीमोफीलिया एक ऐसा रोग है जिसमें रक्त का थक्का (Clot) नहीं जमता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस बीमारी में बाह्य रक्तस्राव से अधिक खतरनाक आंतरिक रक्तस्राव होता है, जो दिखाई नहीं देता लेकिन जानलेवा हो सकता है।

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प्रमुख लक्षण: जोड़ों में सूजन, मल-मूत्र में खून आना, शरीर का पीला पड़ना, घबराहट, लकवा और बेहोशी आना इसके गंभीर लक्षण हैं।

बचाव के उपाय: डॉ. तंवर ने सुझाव दिया कि विवाह के समय कुंडली मिलाने के बजाय रक्त की जांच करानी चाहिए। साथ ही, गर्भस्थ शिशु की जांच और जेनेटिक काउंसलिंग के जरिए इस बीमारी के प्रसार पर अंकुश लगाया जा सकता है।

सोसायटी के नवाचार और सरकारी सुविधाएं
सोसायटी के संरक्षक और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल ने बताया कि बीकानेर चैप्टर द्वारा रोगियों की सुविधा के लिए कई नवाचार किए गए हैं। इनमें आपातकाल के दौरान विद्यार्थियों को घर पर टीका लगाने की सुविधा और आर्थिक सहायता शामिल है। विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि पीबीएम अस्पताल सहित राज्य के कई निजी और सरकारी केंद्रों पर अब हीमोफीलिया का निःशुल्क परामर्श और उपचार उपलब्ध है।

पारिवारिक सहयोग की अपील
शिविर में उपस्थित पूर्व उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रमेश गुप्ता और उप अधीक्षक डॉ. गौरी शंकर जोशी ने भी विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने हीमोफीलिक परिवारों से अपील की कि वे रोगी के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखें और उनकी दिनचर्या व आहार पर विशेष ध्यान दें। कार्यक्रम में सोसायटी अध्यक्ष रवि व्यास और सचिव संतोष कुमार ने ‘सौभाग्यशाली योजना’ और रोगियों को मिलने वाली विशेष किट के बारे में विस्तार से बताया। इस शिविर में बीकानेर और श्रीगंगानगर जिले के अनेक परिवारों ने भाग लिया।

 

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