राजस्थानी भाषा शिक्षण का शंखनाद, बीकानेर के निजी विद्यालय की ऐतिहासिक और लूंठी पहल

राजस्थानी भाषा शिक्षण का शंखनाद, बीकानेर के निजी विद्यालय की ऐतिहासिक और लूंठी पहल
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 15 मई। राजस्थान में राजस्थानी भाषा को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बीकानेर ने एक बार फिर अग्रणी भूमिका निभाई है। श्रीरामसर रोड स्थित संत सांईनाथ पब्लिक स्कूल ने ऐतिहासिक पहल करते हुए अपने विद्यालय में राजस्थानी भाषा शिक्षण का औपचारिक ‘शंखनाद’ कर दिया है।

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‘हरख-उच्छब’ में गूंजी मायड़ भाषा की गूंज
उच्चतम न्यायालय द्वारा राजस्थान सरकार को स्कूल और कॉलेजों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने के आदेश के बाद, संत सांईनाथ पब्लिक स्कूल में ‘हरख-उच्छब’ (खुशी का उत्सव) कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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ऐच्छिक विषय के रूप में शुरुआत: विद्यालय के सचिव डॉ. नमामीशंकर आचार्य ने घोषणा की कि जब तक सरकार का ठोस निर्णय नहीं आता, तब तक स्कूल में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी को ऐच्छिक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।

पाठ्यक्रम: विद्यार्थियों को राजस्थानी शब्द, संस्कृति, साहित्य और संस्कारों का ज्ञान दिया जाएगा। कक्षा 5वीं से 8वीं तक के बच्चों को राजस्थानी व्याकरण पढ़ाई जाएगी, जिसके लिए ‘विद्यार्थी राजस्थानी व्याकरण’ पुस्तकें भी वितरित की गईं।

साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने सराहा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने इसे मील का पत्थर बताया। उन्होंने घोषणा की कि राजस्थानी पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आगामी तीन वर्षों तक पुस्तकें, कॉपियां और पेंसिल वे अपनी ओर से नि:शुल्क प्रदान करेंगे।

प्रमुख विचार:

मुख्य अतिथि श्रीमती सुधा आचार्य ने इसे प्रदेश का पहला विद्यालय बताया जो इस मुहिम से जुड़ा है। उन्होंने साल में एक बार राजस्थानी वेशभूषा और लोकगीत प्रतियोगिता कराने का सुझाव दिया।

डॉ. गौरीशंकर प्रजापत (मोट्यार परिषद): उन्होंने अभिभावकों को बधाई दी जो अपनी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना चाहते हैं।

हिमांशु टाक (जिलाध्यक्ष, मोट्यार परिषद): उन्होंने विश्वास जताया कि अब राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल होने से कोई नहीं रोक सकता।

सांस्कृतिक पहचान की नई किरण
कवि राजाराम स्वर्णकार और राजेश चौधरी ने राजस्थानी को राज्य की दूसरी राजभाषा घोषित करने की मांग दोहराई। प्रधानाध्यापक भवानीशंकर आचार्य ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को अपनी मायड़ भाषा और गौरवशाली संस्कृति से जोड़ना अब उनका मुख्य दायित्व होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर मोट्यार परिषद के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में मोहल्लेवासी और अभिभावक उपस्थित रहे, जिन्होंने करतल ध्वनि के साथ इस निर्णय का स्वागत किया।

 

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