रमक झमक’ में उमड़ा गणगौर का उल्लास, बुजुर्गों ने साझा किए संस्मरण, नई पीढ़ी ने लिया संस्कृति बचाने का संकल्प

रमक झमक' में उमड़ा गणगौर का उल्लास, बुजुर्गों ने साझा किए संस्मरण, नई पीढ़ी ने लिया संस्कृति बचाने का संकल्प
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 30 मार्च 2026। शहर की प्रमुख सांस्कृतिक संस्था ‘रमक झमक’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘म्हारी गणगौर’ उत्सव के दूसरे दिन परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान जहाँ बुजुर्ग महिलाओं ने पुराने दौर के गणगौर पूजन के संस्मरण साझा किए, वहीं युवा पीढ़ी ने आधुनिक युग में इस लोक पर्व की महत्ता पर अपने विचार रखे।

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परंपरागत गीतों के संरक्षण पर जोर
चर्चा की शुरुआत करते हुए रमक झमक के अध्यक्ष प्रहलाद ओझा ‘भैरूं’ ने एक महत्वपूर्ण विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि गणगौर मूलतः महिलाओं का उत्सव है, लेकिन वर्तमान में पुरुष मंडलियों के हावी होने से महिलाओं ने सामूहिक रूप से ‘बड़ी गवर’ गाना कम कर दिया है। ओझा ने आह्वान किया कि “महिलाओं को स्वयं की मंडलियां बनानी चाहिए, जिसमें बुजुर्ग महिलाओं के मार्गदर्शन में नवयुवतियां भी शामिल हों, ताकि लोक गीतों की शुद्ध राग और परंपरा को अगली पीढ़ी तक सुरक्षित पहुँचाया जा सके।”

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संस्कृति और आधुनिकता का संतुलन
परिचर्चा में विभिन्न आयु वर्ग की महिलाओं ने अपनी बात रखी.
अनुभव का साथ: वरिष्ठ महिला किरण सोनी और राजकुमारी व्यास ने कहा कि हमें अपनी बहू-बेटियों को साथ लेकर पारंपरिक आयोजन करने चाहिए।

मूल परंपरा: डॉ. सुरेखा व्यास, चंद्रकला सोनी और बबिता शर्मा का मानना था कि आधुनिकता के साथ चलते हुए हमें अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए।

डिजिटल नवाचार: विनीता शर्मा और गायत्री देरासरी ने रमक झमक द्वारा तैयार ‘म्हारी गणगौर’ पुस्तक की सराहना की, जिसमें QR कोड के जरिए गीतों की सही राग को सीखा जा सकता है। यह तकनीक बालिकाओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रही है।

रचनाओं से महकी गवरजा की भक्ति
उत्सव के दौरान अरुणा सोनी, खुशी सोनी और ज्योति स्वामी ने गणगौर तथा मातृशक्ति पर केंद्रित अपनी स्वरचित रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि योग प्रशिक्षक पिंकी जैन और विशिष्ट अतिथि स्वांग विशेषज्ञ आरती आचार्य रहीं, जबकि अध्यक्षता राम कंवरी ओझा ने की।

भक्ति और पूजन के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन से पूर्व मां गवरजा का विधि-विधान से पूजन, आरती और ‘खोल भराई’ की रस्म अदा की गई। उपस्थित महिलाओं ने सामूहिक स्वर में ‘सुनो ए मां टाबरियों री आशा मनसा पूरो हो’ गीत गाकर माता के जयकारे लगाए। आयोजन की संयोजक ज्योति स्वामी ने सभी का आभार व्यक्त किया।