शिक्षा निदेशालय में काम का बोझ रात 10 बजे तक, पर सुविधाएं शून्य

कमल नारायण आचार्य
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026

बीकानेर शिक्षा निदेशालय में औचक निरीक्षण के बाद कर्मचारी संघ ने सरकार को घेरा

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बीकानेर , 28 अप्रैल। बीकानेर में शिक्षा निदेशालय पर हाल ही में हुए औचक निरीक्षण के बाद अब कर्मचारी संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान (बीकानेर) के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने इस निरीक्षण की कार्यप्रणाली पर गंभीर तथ्यात्मक प्रश्न उठाते हुए सरकार को ज्ञापन भेजा है।

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निरीक्षण पर सवाल: “रात 10 बजे तक काम करने वाले कर्मचारी नहीं दिखे?”
कमल नारायण आचार्य ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव सहित उच्चाधिकारियों को ईमेल के माध्यम से भेजे ज्ञापन में कहा है कि प्रशासनिक सुधार विभाग (ARD) ने केवल उपस्थिति रजिस्टरों का अवलोकन किया, जो कि एकपक्षीय कार्यवाही है। उन्होंने प्रमुख मुद्दे उठाए:

अतिरिक्त कार्य के घंटों की अनदेखी: कर्मचारी रात 10-10 बजे तक और सार्वजनिक अवकाश के दिनों में भी कार्यालय में काम करते हैं, लेकिन निरीक्षण रिपोर्ट में इस तथ्य को कहीं शामिल नहीं किया गया।

ई-फाइल का दबाव: कार्यालय समय समाप्त होने के बाद भी ई-फाइल के माध्यम से पत्रावलियों का आदान-प्रदान और राजकीय कार्य का संपादन चलता रहता है।

कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न: उपस्थिति पंजिका के आधार पर नोटिस देकर उन कर्मचारियों को प्रताड़ित (Harassment) किया जा रहा है जो तय समय से कहीं अधिक सेवा दे रहे हैं।

मूलभूत सुविधाओं का अभाव: “जेब से पैसे देकर पी रहे पानी”
संगठन ने निदेशालय की दयनीय स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक राज्य स्तरीय कार्यालय है, जहाँ पूरे राजस्थान से लोग आते हैं। इसके बावजूद वहां सुविधाओं का भारी टोटा है:

पीने के पानी की समस्या: आगंतुकों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। अनुभागों में कार्यरत कार्मिक अपनी जेब से पैसे खर्च कर पीने के पानी का इंतजाम कर रहे हैं।

गर्मी का कहर: भीषण गर्मी के बावजूद निदेशालय में पर्याप्त एयर कंडीशनर (AC) या कूलर की सुविधा नहीं है।

बुनियादी ढांचा: निरीक्षण टीम ने उपस्थिति तो जांची, लेकिन कार्यालय की इन मूलभूत कमियों का उल्लेख अपनी रिपोर्ट में नहीं किया।

संगठन की प्रमुख मांगें और अल्टीमेटम
कर्मचारी संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे संगठनात्मक कदम उठाने को मजबूर होंगे। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

सुविधाओं की उपलब्धता: जिस तत्परता से उपस्थिति जांची गई, उसी तत्परता से कार्यालय में पानी, कूलिंग और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

समय की पाबंदी: स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं कि शाम 6 बजे के बाद कोई भी कर्मचारी कार्यालय में नहीं रुकेगा और न ही ई-फाइल पर कोई कार्य संपादित किया जाएगा।

अवकाश का सम्मान: रविवार या अन्य राजपत्रित अवकाश के दिनों में किसी भी कर्मचारी को कार्य के लिए बाध्य न किया जाए।

 

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