स्मार्ट मीटर और नियमों के उल्लंघन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दर्ज कराई शिकायत
स्मार्ट मीटर और नियमों के उल्लंघन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दर्ज कराई शिकायत


- बीकेसीएल कार्यालय में जन सुनवाई
बीकानेर, 15 मई। शहर के पब्लिक पार्क स्थित बीकेसीएल (BKCEL) कार्यालय में आयोजित जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं से जुड़े कई गंभीर मुद्दे गरमाए। सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश माथुर और बीकानेर सिटीजन एसोसिएशन के एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने बिजली बिलों में मनमाने सर्विस चार्ज, स्मार्ट मीटर के नाम पर की जा रही अनुचित कार्रवाई और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग को लेकर एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है।


एमओयू (MoU) के नियमों को ताक पर रखकर बदले जा रहे हैं मीटर
शिकायतकर्ताओं ने जोधपुर विद्युत वितरण निगम और बीकेसीएल के बीच हुए मूल समझौते (MoU/Agreement) का हवाला देते हुए गंभीर आरोप लगाए।


बिंदु संख्या 5.8.5 का उल्लंघन: समझौते के अनुसार, बीकेसीएल कंपनी केवल उन्हीं मीटरों को बदल सकती है जो या तो बंद (रुके हुए) हैं या तकनीकी रूप से खराब हैं।
मनमानी कार्रवाई: आरोप है कि कंपनी इस नियम के विपरीत जाकर उपभोक्ताओं के घरों में लगे बिल्कुल सही और सुचारू मीटरों को भी जबरन हटा रही है। उनकी जगह हल्की गुणवत्ता वाले नए मीटर लगाकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला जा रहा है।
धारा 163 के तहत नोटिस देने का अधिकार नहीं
एडवोकेट हनुमान प्रसाद शर्मा ने कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बीकेसीएल जोधपुर विद्युत वितरण निगम से अलग, अपने स्वयं के नियमों पर चलने वाली एक निजी फ्रेंचाइजी कंपनी है, जो केवल बीकानेर शहर में बिजली सप्लाई, पोल और मरम्मत का कार्य संभालती है।
कानूनी वैधता पर सवाल: भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 163 के अंतर्गत उपभोक्ताओं को नोटिस जारी करने का अधिकार केवल अधिकृत सरकारी बोर्ड (जोधपुर विद्युत वितरण निगम) के पास है। बीकेसीएल एक निजी फर्म होने के नाते यह कानूनी नोटिस जारी नहीं कर सकती।
नियमों के विरुद्ध घरों के बाहर लगाए जा रहे हैं मीटर
जन सुनवाई में मीटरों की लोकेशन को लेकर भी शिकायत दर्ज की गई। नियमानुसार, उपभोक्ता का बिजली मीटर मकान के मुख्य प्रवेश द्वार के अंदर या गेट के बिल्कुल नजदीक लगाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, बीकेसीएल फर्म नियमों को ताक पर रखकर मीटरों को घरों की बाहरी दीवारों (सड़क पर) लगा रही है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी अनुचित है।
बिल जमा कराने की मियाद कम, पेनल्टी की वसूली तेज
उपभोक्ताओं के साथ हो रहे भेदभाव को उजागर करते हुए बताया गया कि जहां प्रदेश के अन्य जिलों में बिजली का बिल जमा करवाने के लिए 14 दिन का समय दिया जाता है, वहीं बीकानेर में बीकेसीएल मात्र 10 दिनों में ही बिल जमा कराने का नोटिस थमा देती है। तय समय सीमा कम होने के कारण उपभोक्ताओं को मजबूरन पेनल्टी (विलंब शुल्क) भुगतनी पड़ रही है।
इसके साथ ही, सरकारी बिल्डिंग में बीकेसीएल जैसी निजी कंपनी द्वारा बिना कोई किराया दिए अवैध रूप से कार्यालय संचालित करने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन सभी बिंदुओं पर तुरंत जांच कर उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है।


