भामाशाहों के सहयोग से संवरा दो बेटियों का भविष्य

भामाशाहों के सहयोग से संवरा दो बेटियों का भविष्य
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quicjZaps 15 sept 2025

 जमीअत उलमा-ए-हिन्द ने पूगल के पीड़ित परिवार की सामाजिक विदाई में की बड़ी मदद

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बीकानेर, 19 मई। जमीअत उलमा-ए-हिन्द (शाखा बीकानेर) द्वारा अपनी सामाजिक सरोकार और खिदमत की परंपरा को जारी रखते हुए एक बार फिर इंसानियत और आपसी सहयोग की बेहतरीन मिसाल पेश की गई है। संस्था की ओर से ग्रामीण क्षेत्र की पूगल तहसील के एक अत्यंत जरूरतमंद परिवार की दो बेटियों की शादी के लिए बड़े पैमाने पर घरेलू सामान और नकद राशि की सहायता प्रदान की गई है। जमीअत की इस मानवीय और संवेदनशील पहल से संकटग्रस्त पिता और उनके परिवार को बहुत बड़ी राहत मिली है।

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जमीअत उलमा-ए-हिन्द बीकानेर के महासचिव मौलाना मोहम्मद इरशाद क़ासमी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि जब इस जरूरतमंद परिवार की दयनीय आर्थिक स्थिति और बेटियों के विवाह की बात संगठन के सामने आई, तो संस्था ने तुरंत सक्रियता दिखाई। जमीअत की ओर से शहर के भामाशाहों, प्रबुद्ध नागरिकों और समाज के नेकदिल लोगों से इस पुनीत कार्य के लिए विशेष सहयोग की अपील की गई थी। इस अपील के बाद शहर के कई संवेदनशील लोग आगे आए और बच्चियों के सुखद भविष्य के लिए अपना दिल खोलकर योगदान दिया।

इस सामूहिक सहयोग के माध्यम से दोनों बेटियों की विदाई के सफर को आसान बनाने के लिए बड़े पैमाने पर सामग्री सौंपी गई। प्रदान की गई सहायता सामग्री के अंतर्गत 2 लोहे की अलमारी, 2 बॉक्स (ट्रंक), 2 डबल बेड पलंग, 2 आरामदायक गद्दे और गर्मी से राहत के लिए 2 प्लास्टिक कूलर शामिल हैं। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2 हाथ सिलाई मशीनें भी भेंट की गईं। इसके अतिरिक्त, रसोई के लिए 61-61 पीस के दो भव्य स्टील बर्तन सेट और शादी की अन्य तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दोनों बेटियों को 2100-2100 रुपए की नकद राशि सम्मानपूर्वक भेंट की गई।

महासचिव मौलाना इरशाद क़ासमी ने इस नेक मुहिम में आहुति देने वाले सभी भामाशाहों और दानदाताओं का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। उन्होंने समाज को एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिन्द इससे पहले भी कई बेसहारा बच्चियों की शादियों में सहयोग करती रही है और भविष्य में भी सामाजिक खिदमत का यह सिलसिला पूरी शिद्दत के साथ जारी रहेगा। उन्होंने संपन्न वर्ग से आह्वान किया कि समाज के सहयोग से ही गरीब परिवारों की मुश्किलें आसान हो सकती हैं, इसलिए सभी को ऐसे पुनीत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए।

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