श्री राम जन्मोत्सव पर सीताराम भवन में गूंजे जयकारे, सचेतन झांकियों ने मोहा मन
श्री राम जन्मोत्सव पर सीताराम भवन में गूंजे जयकारे, सचेतन झांकियों ने मोहा मन


बीकानेर, 19 मई। स्थानीय सीताराम गेट के भीतर स्थित सीताराम भवन में आयोजित ‘श्री रामकथा अमृतोत्सव’ के दौरान मंगलवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर भव्य सचेतन झांकियां सजाई गईं, और पूरा परिसर भक्ति गीतों, नृत्यों तथा “जय श्री राम” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। उत्सव के दौरान सोमानी परिवार की ओर से उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद और नकदी बधाई के रूप में वितरित की गई। विशेष बात यह रही कि भगवान श्री राम के साथ-साथ उनके परम भक्त हनुमान जी का भी जन्मोत्सव मनाया गया, जिसके तहत ठाकुर जी के बाल्यकाल के सुंदर कट-आउट लगाए गए और समूचे भवन को विशेष रूप से सजाया गया।


कथाव्यास पंडित पुरुषोत्तम जी व्यास “मीमांसक” ने भगवान राम और हनुमान जी के प्राकट्य प्रसंग को सुनाते हुए उनके जीवन आदर्शों का स्मरण कराया। उन्होंने अपनी भजन मंडली के साथ पारंपरिक राजस्थानी और हिंदी के बधाई गीत व भजन प्रस्तुत किए, जिनमें “अवध पुरी में बाजे बधाई, राम जन्मे हैं आज”, “कौशल्या के नंदन आए” और गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित प्रसिद्ध स्तुति “भए प्रगट कृपाला दीनदयाला” शामिल रहे। इसके साथ ही “अंजनी माता ने जायो लाल, बधाई सारे भक्तां ने” जैसे भजनों पर श्रोता भावविभोर हो गए और अनेक श्रद्धालुओं ने पंडाल में नृत्य कर माहौल को पूरी तरह भक्ति रस में डुबो दिया।


श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पंडित “मीमांसक” ने कहा कि मर्यादा, धर्म और आदर्श के प्रतीक प्रभु श्री राम का जीवन हमें सत्य, कर्तव्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। अनन्य भाव से उनका नाम स्मरण करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। उन्होंने ब्रह्मलीन स्वामी रामसुखदास जी का स्मरण करते हुए बताया कि खुद को परमात्मा का मानकर की गई साधना, आराधना और शास्त्र सम्मत जीवन शैली से ही मानव कल्याण संभव है। इस भव्य अमृतोत्सव का आयोजन स्वर्गीय सीताराम सोमानी की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा देवी सोमानी एवं समस्त सोमानी परिवार द्वारा किया जा रहा है, जिन्होंने इस अवसर पर एक समान पोशाक धारण कर भगवान श्री राम के जन्मोत्सव में सहभागिता निभाई और विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की।


