तृतीय राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान समारोह संपन्न
तृतीय राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान समारोह संपन्न


- डॉ. विमला डुकवाल, डॉ. सत्यनारायण सोनी और विजय सिंह राठौड़ सम्मानित
बीकानेर, 23 मई। प्रज्ञालय संस्थान एवं श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में नागरी भंडार स्थित नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में एक भव्य साहित्यिक आयोजन संपन्न हुआ। देश के ख्यातनाम साहित्यकार, रंगकर्मी, चिंतक एवं शिक्षाविद कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की पावन स्मृति में तीसरे राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें कला, साहित्य और शिक्षा जगत की नामचीन हस्तियों ने शिरकत की।


साहित्य-रंगकर्म के अनथक यात्री थे ‘बाऊजी’
समारोह के मुख्य अतिथि राजूवास (RAJUVAS) के कुलगुरु एवं देश के प्रख्यात पशु चिकित्सा विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. सुमंत व्यास ने स्व. रंगा के विराट व्यक्तित्व और कृतित्व को विलक्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्व. रंगा द्वारा विभिन्न कलानुशासनों को प्रदान की गई समर्पित सेवाएं नई पीढ़ी को संस्कार देने और मार्गदर्शन के लिए हमेशा उपयोगी रहेंगी। उनका विपुल साहित्य समाज के लिए एक प्रेरणापुंज है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार व रंगकर्मी मधु आचार्य ’’आशावादी’’ ने भावुक होते हुए कहा कि यूं ही कोई इंसान हर किसी के लिए ‘बाऊजी’ नहीं बन जाता। इसके लिए जिस समर्पण और कृतित्व की आवश्यकता होती है, वह स्व. रंगाजी के पास था। वे सच्चे अर्थों में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पुरोधा थे, जिनकी समृद्ध विरासत को उनके परिवार ने बखूबी संजोकर रखा है।
विशिष्ट अतिथि एवं देश के ख्यातनाम आलोचक व चिंतक मालचंद तिवाड़ी ने स्व. रंगा को साहित्य-रंगकर्म का अनथक यात्री बताते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य की सभी विधाओं में सृजन के साथ नवाचार किए और विशेष रूप से राजस्थानी नाटकों को भारतीय भाषाओं के समकक्ष प्रतिष्ठित करने में ऐतिहासिक योगदान दिया।
तीन विभूतियों को मिला ‘प्रज्ञा सम्मान’
समारोह के दौरान अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट एवं प्रेरणादायक सेवाएं देने के लिए तीन राज्य स्तरीय विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में: डॉ. विमला डुकवाल, साहित्य के क्षेत्र में: डॉ. सत्यनारायण सोनी , रंगकर्म के क्षेत्र में: विजय सिंह राठौड़।
समारोह के मंच पर उपस्थित अतिथियों ने इन तीनों विभूतियों को माला, श्रीफल, शॉल, स्मृति उपहार, रंगा जी की पुस्तकों का सेट एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर नवाजा। सम्मानित हस्तियों के अभिनंदन पत्र का वाचन क्रमशः ज्योति प्रकाश रंगा, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत एवं क़़ासिम बीकानेरी द्वारा किया गया।
सम्मानित विभूतियों ने व्यक्त किए विचार
अपने सम्मान के प्रत्युत्तर में डॉ. विमला डुकवाल ने कहा कि वे ‘प्रज्ञा’ शब्द की गहराई को समझते हुए शिक्षा की दिशा में निरंतर कार्यरत रहने की चुनौती को स्वीकार करती हैं। डॉ. सत्यनारायण सोनी ने इस सम्मान को अपने जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार बताते हुए कहा कि इससे समाज के प्रति उनका सृजनधर्मिता का दायित्व और बढ़ गया है। वहीं रंगकर्मी विजय सिंह राठौड़ ने कहा कि लक्ष्मीनारायण रंगा ने उनकी और उनके बाद की कई पीढ़ियों को रंगकर्म के संस्कार दिए हैं, जो हमेशा मार्गदर्शक रहेंगे।
‘जब तक लिखूंगा-तब तक बचूंगा’
इससे पूर्व वरिष्ठ व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने स्व. रंगा के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके जीवन का मूल मंत्र ’’जब तक लिखूंगा-तब तक बचूंगा’’ था, जिसे उन्होंने जीवन के अंतिम समय तक अपने विपुल लेखन से साबित किया। समारोह के प्रारंभ में वरिष्ठ शिक्षाविद राजेश रंगा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, वहीं समारोह के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कीर्तिशेष रंगा से जुड़े कई अनछुए प्रसंग साझा किए।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ उद्घोषक ज्योति प्रकाश रंगा ने किया तथा युवा कवि गिरिराज पारीक ने आगंतुकों का आभार ज्ञापित किया। इस गरिमामयी समारोह में शहर के सैकड़ों साहित्यकार, रंगकर्मी, बुद्धिजीवी, प्राध्यापक और गणमान्य नागरिक साक्षी रहे।


