गौ माता की सेवा व पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति: ग्वाल संत

गौ माता की सेवा व पूजा करने से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति: ग्वाल संत
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quicjZaps 15 sept 2025
  • केसरदेसर जाटान गांव में श्री गौ नंदी कृपा कथा और सुरभि यज्ञ का भव्य आयोजन
  • गौ माता राष्ट्रमाता” के नारों से गूंजा क्षेत्र; महिलाओं ने हाथों पर मेहंदी से रचाया गौ माता का नाम

बीकानेर, 2 जून । बीकानेर के केसरदेसर जाटान गांव में ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ को प्रचंड वेग देने के लिए आयोजित श्री गौ नंदी कृपा कथा के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। गौशाला प्रांगण में आयोजित इस संगीतमय कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गौ माता के जयकारों के साथ आध्यात्मिक लाभ उठाया। गौ रक्षा के संकल्प के साथ सुबह सुरभि यज्ञ में आहुतियां दी गईं, जो क्षेत्र की सुख-समृद्धि और गौ सेवा के संकल्प को मजबूती प्रदान कर रही हैं।

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यज्ञ और कथा का नियमित क्रम
गौ भक्त श्रीमती मणका देवी-गोपी किशन चांडक, जुगल-मधु चांडक और चांडक परिवार के साथ गांव के सर्व समाज के सहयोग से यह भव्य आयोजन हो रहा है। कार्यक्रम की रूपरेखा इस प्रकार है।

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  • सुरभि यज्ञ: प्रतिदिन सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे तक।
  • गौ नंदी कृपा कथा: दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • यह आयोजन आगामी 6 जून तक अनवरत जारी रहेगा।

मेहंदी और लेखन के जरिए “गौ माता राष्ट्रमाता” का संदेश
इस आयोजन की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिलाएँ और बालक-बालिकाएं अपने हाथों पर मेहंदी से “गौ माता राष्ट्रमाता” लिखवाकर कथा स्थल पर पहुँच रहे हैं। इतना ही नहीं, अभियान के प्रति समर्पण दिखाते हुए ग्रामीणों ने अपने घरों के मुख्य द्वारों पर भी “गौ माता राष्ट्रमाता” का अंकन करवा दिया है, जो गांव में गौ भक्ति के वातावरण को दर्शा रहा है।

गौ माता की महिमा: ग्वाल संत का पाथेय
श्री गोपाल परिवार संघ के संस्थापक और ग्वाल संत गोपाल नंदजी सरस्वती (गुरुजी) ने व्यासपीठ से विभिन्न पुराणों और ग्रंथों का हवाला देते हुए गौ माता की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने अग्नि पुराण, शिव पुराण, ब्रह्मपुराण और श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों के साथ-साथ करणी माता के गौ सेवा प्रसंगों को साझा किया।

ग्वाल संत के प्रमुख विचार:

33 कोटि देवताओं का वास: गौ माता के शरीर में सभी देवी-देवताओं का निवास है, अतः उनकी पूजा से संपूर्ण देव कृपा प्राप्त होती है।

चतुर्थ पुरुषार्थ की प्राप्ति: गाय की सेवा से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पंचगव्य का महत्व: गाय का दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर ‘पंचगव्य’ के रूप में अमृत समान हैं, जो रोगों और पापों का नाश करते हैं।

पुत्र प्राप्ति के उदाहरण: उन्होंने इतिहास और शास्त्रों से कई ऐसे उदाहरण दिए जहां गौ सेवा के माध्यम से संतान सुख की प्राप्ति हुई।

गौ सेवकों का हुआ सम्मान
कथा के समापन पर गौ सेवा के क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। इसमें प्रकाश तोषनीवाल, मनोहर लाल पंडया, राधा प्रकाश, ओम प्रकाश चांडक, शिव नारायण तोषनीवाल (नोखा), डॉ. गोपाल सहित वर्तमान व पूर्व सरपंचों और जिला परिषद सदस्यों को चांडक परिवार द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रयाग चंद चांडक सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

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