केसरदेसर बोहरान में ‘खेत बचाओ अभियान”, NRCC के वैज्ञानिकों ने 36 किसानों को दिए मिट्टी जांच और संतुलित उर्वरक उपयोग के टिप्स
केसरदेसर बोहरान में खेत बचाओ अभियान



बीकानेर, 11 जून। भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर द्वारा गुरुवार को ग्राम केसरदेसर बोहरान में एक दिवसीय किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस शिविर में गांव के 36 किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी ली।


मृदा परीक्षण से घटेगी खेती की लागत
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित एनआरसीसी के वैज्ञानिक डॉ. धवलकांत ने किसानों को मृदा (मिट्टी) परीक्षण के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल के बजाय मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही संतुलित मात्रा में खाद का उपयोग करना चाहिए। इससे न केवल मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि किसानों की खेती की लागत (कृषि इनपुट कॉस्ट) में भी भारी कमी आएगी। उन्होंने काश्तकारों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।


मृदा स्वास्थ्य कार्ड और जल संरक्षण पर जोर
अभियान के आयोजन सचिव डॉ. बी. श्रीशैलम ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के मूल उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य ध्येय किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card), संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जल संरक्षण और उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना है, ताकि भूमि की उर्वरा शक्ति लंबे समय तक बरकरार रह सके।
जून माह में चल रहा है विशेष अभियान
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों से इस अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि भारत सरकार द्वारा 1 जून से 30 जून 2026 तक यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बीकानेर संभाग के अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचकर किसानों को मिट्टी जांच आधारित खेती करने के लिए प्रेरित किया जाए।
प्रगतिशील किसानों ने जताया आभार
ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के लिए राजस्थान सरकार के कृषक-मित्र भूरामल राईका और गांव के प्रगतिशील किसान मोडाराम ने एनआरसीसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस अभियान को समय की मांग बताया। कार्यक्रम के सफल संचालन में केंद्र के सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी मनजीत सिंह ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और तकनीकी पहलुओं पर किसानों का मार्गदर्शन किया।


