सफल दायित्व निर्वहन के लिए साहस और स्पष्ट विजन आवश्यक- मुनिश्री
सफल दायित्व निर्वहन के लिए साहस और स्पष्ट विजन आवश्यक- मुनिश्री



राजराजेश्वरी नगर, 16 जून । श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, राजराजेश्वरी नगर के कार्यकाल वर्ष 2026-28 हेतु नवमनोनीत अध्यक्ष कमलसिंह दुगड़ एवं उनकी नवगठित कार्यसमिति का “दायित्व बोध संकल्प समारोह” आध्यात्मिक और अत्यंत सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। MBR शांग्रीला अपार्टमेंट में आयोजित यह गरिमामय समारोह आचार्य श्री महाश्रमणजी के विद्वान शिष्य मुनि श्री विनीत कुमार जी, मुनि श्री आकाश कुमार जी, मुनि श्री हितेन्द्र कुमार जी एवं मुनि श्री पुनीत कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित किया गया।


कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुनिश्री द्वारा किए गए नवकार मंत्रोच्चारण और MBR शांग्रीला की बहनों द्वारा प्रस्तुत सुमधुर मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद मनीष जी पगारिया ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया और उपस्थित श्रावक समाज द्वारा ऊर्जावान सभा गीत का सामूहिक संगान किया गया।


सफल दायित्व निर्वहन के लिए साहस और स्पष्ट विजन आवश्यक: मुनिश्री
समारोह में उपस्थित चारित्रात्माओं ने नवगठित टीम को अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरक पाथेय से अभिसिंचित किया।
धर्म और संघ का समन्वय
मुनि श्री विनीत कुमार जी एवं मुनि श्री आकाश कुमार जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि जीवन में व्यवस्था अथवा दायित्व से जुड़ने पर हमारी जिम्मेदारी बहुत अधिक बढ़ जाती है। सफल दायित्व निर्वहन के लिए साहस, सकारात्मक सोच और एक स्पष्ट विजन का होना अनिवार्य है। उन्होंने सीख दी कि धर्मसंघ से जुड़े होने के साथ-साथ स्वयं के भीतर धर्म से जुड़ना भी आत्मिक उत्थान के लिए आवश्यक है।
नशामुक्ति संकल्प की सराहना: मुनिश्री ने समारोह के दौरान उपस्थित जनसमुदाय द्वारा लिए गए नशामुक्ति के संकल्प की भूरि-भूरि सराहना की और इसे समाज के उज्ज्वल भविष्य का परिचायक बताया।
शपथ ग्रहण और नई कार्यकारिणी की घोषणा
समारोह के मुख्य चरण में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री प्रकाश जी लोढ़ा ने उपस्थित सभी सदस्यों को ‘श्रावक निष्ठा पत्र’ का वाचन करवाया। इसके बाद निवर्तमान अध्यक्ष राकेश जी छाजेड़ ने नवमनोनीत अध्यक्ष कमलसिंह जी दूगड़ को अध्यक्ष पद के दायित्व-बोध का संकल्प करवाया।
कार्यभार संभालने के पश्चात नवनियुक्त अध्यक्ष कमलसिंह दुगड़ ने वर्ष 2026-28 के लिए अपनी नई टीम के पदाधिकारियों एवं कार्यसमिति सदस्यों के नामों की आधिकारिक घोषणा की, जिन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।अध्यक्ष-कमलसिंह दुगड़, उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज आर. बैद, राजेश छाजेड़, गुलाब बाँठिया, मंत्री-अमित नौलखा,कोषाध्यक्ष- देवेन्द्र नाहटा, सहमंत्री विकास छाजेड़, मनोज जी बैद, संगठन मंत्री- सुशील भंसाली “छापर” .संरक्षक एवं परामर्शक मंडल-मूलचंद नाहर, बिमल बाँठिया, विमल कटारिया, मनोज डागा, पारस बाफना। शपथ ग्रहण के उपरांत संपूर्ण नवगठित टीम ने मुनिवृन्द के चरणों में विधिवत वंदना कर आशीर्वाद लिया। समाज के सभी वर्गों, वरिष्ठजनों और युवाओं के सुंदर समावेश से सुसज्जित यह नई टीम अत्यंत उत्साहित नजर आई।
जिम्मेदारी ही वास्तविक साधना है: अध्यक्ष दुगड़
अपने प्रथम अध्यक्षीय वक्तव्य में नवमनोनीत अध्यक्ष कमलसिंह दुगड़ ने गहरी निष्ठा व्यक्त करते हुए कहा कि वे देव-गुरु-धर्म की साक्षी में स्वयं को संघहित के लिए समर्पित एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “पद मात्र एक व्यवस्था है, जबकि जिम्मेदारी ही वास्तविक साधना है।” उन्होंने गुरु इंगित की आराधना करते हुए चारित्रात्माओं की यथोचित सेवा व दर्शन को अपना मुख्य लक्ष्य बताया और पूरी टीम के साथ गुरुदर्शन हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त की। इससे पूर्व, निवर्तमान अध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया और अपने 2 वर्ष के सफल कार्यकाल का पूरा श्रेय अपनी निवर्तमान टीम के समर्पण को दिया।
वरिष्ठ प्रबुद्धजनों ने दी शुभकामनाएं
इस अवसर पर महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रकाश लोढ़ा, अभातेयुप के संगठन मंत्री रोहित कोठारी, अभातेममं की सहमंत्री श्रीमती मधु कटारिया, राजस्थान परिषद के अध्यक्ष संजय बैद, तेयुप राजराजेश्वरी नगर के नवमनोनीत अध्यक्ष सरल पटावरी, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती मंजु बोथरा तथा MBR शांग्रीला से श्रीमती मीना डोशी ने राकेश छाजेड़ के कार्यकाल की सराहना की और नई टीम को बधाई दी। कार्यक्रम में महासभा से संजय बांठिया, विजयनगर के सभाध्यक्ष भंवरलाल मांडोत और यशवंतपुर सभाध्यक्ष कुंदनमल गन्ना भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का अत्यंत कुशल व सफल संचालन सभा के निवर्तमान मंत्री गुलाब बाँठिया ने किया तथा उपस्थित जनों का आभार ज्ञापन नवनियुक्त सहमंत्री विकास छाजेड़ ने प्रस्तुत किया। समारोह का समापन मुनिवृंद के पावन सामूहिक मंगलपाठ के साथ हुआ।


