मूक पक्षियों के लिए परिंडों (पालसियों) का वितरण कर समाज को दिया सेवा, करुणा और जीव-रक्षा का संदेश

मूक पक्षियों के लिए परिंडों (पालसियों) का वितरण कर समाज को दिया सेवा, करुणा और जीव-रक्षा का संदेश
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बीकानेर, 16 जून । भीषण गर्मी और तपती धूप के इस दौर में बेज़ुबान पक्षियों के लिए दाने-पानी की व्यवस्था को बढ़ावा देने तथा जन-मानस में करुणा व जीव-रक्षा की भावना जागृत करने के उद्देश्य से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल-पात्रों (पालसियों) का बड़े पैमाने पर वितरण किया गया। यह पुनीत अभियान “करुणा क्लब बीकानेर” और “गीता ज्ञान परीक्षा” के संयुक्त तत्वावधान में चलाया जा रहा है।

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अभियान के तहत मंगलवार प्रातः ऐतिहासिक शिव मठ, शिवबाड़ी परिसर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यहाँ मठ के महंत स्वामी विमर्शानन्द गिरि जी महाराज के पावन कर-कमलों से “गीता ज्ञान परीक्षा” एवं “करुणा क्लब बीकानेर” अंकित 100 विशेष जल-पात्रों का वितरण वहां उपस्थित दर्शनार्थियों व प्रबुद्ध नागरिकों को किया गया। महाराज श्री ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए सभी से अपने घरों की छतों और बालकनी में पक्षियों के लिए नियमित पानी रखने का आह्वान किया। इस अवसर पर वरिष्ठ साधक घनश्याम साध, सुनीता, हिमांशु, पशु चिकित्सक डॉ. रामगोपाल, करुणा क्लब के मनोज सिंह राजपुरोहित, ओमानाराम प्रजापत तथा क्लब के सचिव राजेश रंगा ने व्यवस्थाएं संभालते हुए अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

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विभिन्न पार्कों और कॉलोनियों में भी बांटी गईं 101 पालसियां
शिवबाड़ी के साथ-साथ शहर के अन्य रिहायशी इलाकों और सार्वजनिक पार्कों में भी इस अभियान को गति दी गई। मुक्ताप्रसाद नगर स्थित दादा-पोता पार्क एवं रामपुरा बस्ती क्षेत्र में प्रातःकालीन भ्रमण (मॉर्निंग वॉक) पर आने वाले लोगों को जागरूक करते हुए 101 पालसियों का निःशुल्क वितरण किया गया।

नागरिकों से विशेष आग्रह: कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षा अधिकारी घनश्याम साध, पशु चिकित्सक डॉ. रामगोपाल, करुणा क्लब के सचिव राजेश रंगा और हिमांशु सहित अन्य जागरूक कार्यकर्ताओं ने पार्क में आए आमजन को ये पात्र सौंपे। कार्यकर्ताओं ने सभी से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि इन पात्रों में प्रतिदिन स्वच्छ जल भरा जाए और पक्षियों के लिए चुग्गे (दाने) की भी उचित व्यवस्था की जाए।

भावी पीढ़ी में पर्यावरण और जीव-रक्षा के संस्कारों का बीजारोपण: आयोजकों ने बताया कि इस संपूर्ण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आमजन, विशेषकर छोटे बच्चों में पशु-पक्षियों के प्रति दया भाव, पर्यावरण संरक्षण तथा जीव-रक्षा के सनातन संस्कारों को विकसित करना है, ताकि नई पीढ़ी प्रकृति और उसके सह-अस्तित्व के प्रति अधिक संवेदनशील बन सके।

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