नगर की पांच प्रतिष्ठित विभूतियों को मिला स्मृति सम्मान

नगर की पांच प्रतिष्ठित विभूतियों को मिला स्मृति सम्मान
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  • दिवंगत सरोज भटनागर का जन्मोत्सव धूमधाम से संपन्न

बीकानेर, 17 जून। सरोज भटनागर जी का सम्पूर्ण जीवन प्रेरणा का एक जीवंत स्रोत रहा है। आकाशवाणी की उद्घोषक, संगीतज्ञ, खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने बीकानेर की कला, साहित्य व संगीत से जुड़ी दो से तीन पीढ़ियों को संस्कारित करने का अभूतपूर्व कार्य किया। उनकी जयंती पर आयोजित यह भव्य समारोह संपूर्ण बीकानेर के लिए गौरव का प्रतीक है।” यह मर्मस्पर्शी उद्गार राजस्थान उच्च न्यायालय (जोधपुर) के पूर्व न्यायाधिपति एवं राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास ने व्यक्त किए।

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जस्टिस व्यास संस्कृतिकर्मी कीर्तिशेष स्व. सुश्री सरोज भटनागर स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित 77 वीं जयंती जन्मोत्सव एवं सम्मान समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे। महाराजा नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में उन्होंने आकाशवाणी से सरोज दीदी के लंबे जुड़ाव, उनके कड़े अनुशासन और उनसे प्राप्त अनुभवों के संस्मरण भी साझा किए।

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कला-संस्कृति का वैभव और अलमस्त अपनापन ही असली बीकानेरियत: डॉ. खड़गावत
समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के श्रम विभाग के संयुक्त शासन सचिव (आईएएस) डॉ. महेंद्र खड़गावत ने अपने संबोधन में कहा कि बीकानेर के साहित्य, कला एवं संस्कृति के वैभव के साथ-साथ यहां का अलमस्त अपनापन ही असली बीकानेरियत की पहचान है, जिस पर हर नागरिक को गर्व होता है।

प्रथम महिला उद्घोषक को नमन: डॉ. खड़गावत ने सरोज भटनागर की उद्घोषणा कला की सराहना करते हुए कहा कि वे क्षेत्र की पहली महिला उद्घोषक थीं, जिनके पदचिह्नों पर चलकर अनेक महिलाओं को इस क्षेत्र में आने का संबल और हौसला मिला।

सराहनीय निर्णय: उन्होंने जयंती के अवसर पर नगर की पांच प्रतिभाओं को सम्मानित करने के निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि स्मृतियों को अक्षुण्ण रखने का यह सबसे श्रेष्ठ माध्यम है और यह सिलसिला अनवरत जारी रहना चाहिए।

इन पांच विभूतियों को प्रदान किया गया ‘सरोज भटनागर स्मृति सम्मान’
संस्थान के प्रबंधक नंदकिशोर सोलंकी (नंदू भाई) ने बताया कि स्व. सरोज भटनागर की स्मृति में आयोजित इस प्रथम वर्ष के सम्मान समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में जीवनपर्यंत विशिष्ट अवदान देने वाली नगर की पांच प्रमुख विभूतियों को सारस्वत सम्मान से नवाजा गया। डॉ. प्रभा भार्गव (वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता), प्रदीप भटनागर (वरिष्ठ रंगकर्मी), मोहनलाल शर्मा (वरिष्ठ संगीतज्ञ), डॉ. अशोक शर्मा (वरिष्ठ संगीतज्ञ), प्रो. दीपाली धवन (प्रख्यात शिक्षाविद्).

इन सभी विभूतियों को समारोह के अध्यक्ष जस्टिस गोपाल कृष्ण व्यास एवं मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र खड़गावत द्वारा अवार्ड व अभिनंदन पत्र भेंट किए गए। साथ ही निकिता सोलंकी, सविता अग्रवाल, डिम्पल पुरोहित सहित अन्य सहयोगियों द्वारा माला, शॉल, श्रीफल और साफा पहनाकर उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया।

वंदना, नज़्म और संस्मरणों से जीवंत हुईं यादें
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा व स्व. सरोज भटनागर के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि के साथ हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार एवं गीतकार राजेंद्र स्वर्णकार ने सुमधुर सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने स्वागत भाषण देते हुए आयोजन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि सरोज दीदी ने जीवन भर अनुशासन व शुचिता को आत्मसात किया। रविंद्र सुतार ने उनके जीवन से जुड़े कई रोचक संस्मरण साझा किए।

सम्मानित विभूतियों के अभिनंदन पत्र का वाचन आकाशवाणी बीकानेर के उद्घोषक प्रतिमा तिवाड़ी, रामसहाय हर्ष, नासिर ज़ैदी, रेखा भाटी एवं आत्माराम भाटी द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ शाइर बुनियाद हुसैन ज़हीन ने सरोज भटनागर को समर्पित एक खूबसूरत नज़्म पेश की।

विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य जन रहे साक्षी: इस भव्य आयोजन में शांति लाल सुराणा, मधु आचार्य ‘आशावादी’, निलय सोलंकी, हरीश बी. शर्मा, दीपचंद सांखला, जे.पी. व्यास, राजबिहारी माथुर, कैलाश चंद्र आसवानी सहित कला, साहित्य और प्रशासन से जुड़ी सैकड़ों नामचीन हस्तियां उपस्थित रहीं। संस्थान की ओर से आभार ज्ञापन शांति लाल सुराणा ने किया, जबकि पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन संजय पुरोहित द्वारा किया गया।

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