बाबा रामदेव पार्क में गूंजे वेदमंत्र; पतंजलि योग समिति के संस्कार शिविर में बच्चों ने दी आहुतियां
बाबा रामदेव पार्क में गूंजे वेदमंत्र; पतंजलि योग समिति के संस्कार शिविर में बच्चों ने दी आहुतियां



बीकानेर, 26 जून। भारत स्वाभिमान पतंजलि योग समिति एवं युवा भारत के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय बाबा रामदेव पार्क में पिछले कई दिनों से (गत 3 जून से) अनवरत रूप से संचालित हो रहे निःशुल्क योग एवं खेलकूद संस्कार शिविर में शुक्रवार को एक विशेष आध्यात्मिक आयोजन हुआ। शिविर के अंतर्गत आज वैदिक यज्ञ-हवन का भव्य आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी और बच्चों को योगिक क्रियाओं के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं एवं सनातन संस्कारों से व्यावहारिक रूप से जोड़ना है। इस दौरान शिविर में प्रशिक्षण ले रहे सैकड़ों बच्चों, युवाओं, माताओं और बहनों ने पूर्ण श्रद्धाभाव और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पवित्र अग्नि में तिल, जौ, घृत (घी) और औषधीय हवन सामग्री की आहुतियां अर्पित कीं।


यज्ञ का संपूर्ण विधान शास्त्रीय पद्धति से विद्वान पंडित नवरतन ओझा महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। आहुतियों के उपरांत बच्चों को संबोधित करते हुए पंडित ओझा ने यज्ञ के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय सनातन संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जो हमारे पर्यावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ मानव जीवन में आंतरिक शुद्धता, अनुशासन, सेवा, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक सोच का संचार करती है।


अवकाश का रचनात्मक उपयोग: शारीरिक-मानसिक विकास के साथ मिल रही नैतिक शिक्षा
शिविर संयोजक नंदकिशोर गहलोत ने कार्यक्रम और शिविर के उद्देश्यों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह निःशुल्क योग एवं खेलकूद संस्कार शिविर पिछले कई वर्षों से प्रतिवर्ष स्कूली बच्चों के ग्रीष्मकालीन अवकाश (समर वेकेशन) के दौरान नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है। इसका मूल उद्देश्य बच्चों की छुट्टियों को रचनात्मक, संस्कारमय और उनके भविष्य के लिए उपयोगी बनाना है। शिविर में प्रतिदिन योगिंग-जॉगिंग, प्राणायाम, विभिन्न खेलकूद, प्रार्थना, भजन, नैतिक शिक्षा, चित्रकला, नशा मुक्ति संकल्प, जन जागरूकता रैली तथा व्यक्तित्व विकास (पर्सनैलिटी डेवलपमेंट) जैसी विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, समाज के प्रबुद्ध और अनुभवी विषय-विशेषज्ञों द्वारा बच्चों का नियमित मार्गदर्शन कराया जा रहा है, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास सर्वांगीण रूप से हो सके।
संयोजक गहलोत ने आगे कहा कि योग और खेलकूद के साथ बच्चों को बचपन से ही भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक अनुशासन और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही संस्कार भविष्य में एक श्रेष्ठ नागरिक और सशक्त राष्ट्र के निर्माण की मजबूत आधारशिला बनते हैं।
तिलक-शिखा के महत्व पर चर्चा और देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति, अंत में बंटा फल प्रसाद
इस विशेष सत्र के दौरान समाज के प्रबुद्धजन गणेश व्यास और नरेंद्र सुथार ने भी बच्चों को अपना प्रेरक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों को सनातन परंपरा के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक पहलुओं को समझाते हुए मस्तक पर तिलक धारण करने तथा चोटी (शिखा) रखने के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। इसी क्रम में उन्होंने बच्चों में स्वदेश प्रेम की भावना जगाने के लिए मारवाड़ी देशभक्ति गीतों की बेहद सुंदर और सुरीली प्रस्तुतियां दीं, जिस पर बच्चे उत्साह से झूम उठे। यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात सभी संभागियों और बच्चों को ताजे फलों का प्रसाद वितरित किया गया।
इस गरिमामय और संस्कारपरक कार्यक्रम को सफल बनाने में युवा प्रभारी भवानी शंकर सांखला, नरेंद्र सुथार, विकास जोशी, महावीर , नत्थूराम , गौरीशंकर सांखला, गुड्डी देवी, शोभा कच्छावा, ऋतु जोशी, सरोज, दीप्ति, हेमलता तथा करिश्मा सहित पतंजलि योग समिति के अनेक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी सक्रिय भूमिका और सराहनीय सेवाएं प्रदान कीं।


