नज़ीर ग़ौरी उर्दू अकादमी और अदब सराय के तत्वावधान में तरही बज़्मे-मुसालमा सम्पन्न
नज़ीर ग़ौरी उर्दू अकादमी और अदब सराय के तत्वावधान में तरही बज़्मे-मुसालमा सम्पन्न



- अक़ीदत के साथ याद की गई हज़रत इमाम हुसैन की शहादत
बीकानेर, 26 जून । शहर में अदबी और मजहबी सरगर्मियों को आगे बढ़ाते हुए नज़ीर ग़ौरी उर्दू अकादमी और अदब सराय, बीकानेर के संयुक्त तत्वावधान में मोहर्रम के मुक़द्दस मौक़े पर हज़रत इमाम हुसैन और अहले बैत की शान में एक अज़ीमुश्शान तरही बज़्मे-मुसालमा (मुशायरा) का आयोजन किया गया। सिटी कोतवाली के सामने नज़ीर ग़ौरी मार्केट स्थित नज़ीर ग़ौरी सभागार में आयोजित यह महफ़िल पूरी कामयाबी के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें शहर के नामचीन शायरों ने कर्बला के महान शहीदों को अपनी अक़ीदत और मोहब्बत का नज़राना पेश किया।


नज़ीर ग़ौरी उर्दू अकादमी के संस्थापक व वरिष्ठ शायर वली मोहम्मद ग़ौरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस विशेष मुशायरे की सदारत (अध्यक्षता) मुफ़्ती अशफ़ाक़ ग़ौरी रज़वी ‘उफ़क़’ ने की। महफ़िल में नगर के 14 वरिष्ठ एवं युवा शायरों ने शिरकत की और तयशुदा मिसर-ए-तरह (थीम लाइन) पर सोचे गए अपने बेहतरीन और रूहानी कलाम के प्रस्तुतीकरण से हज़रत इमाम हुसैन की शहादत और उनके सिद्धांतों को याद किया।


‘कर्बला में है अजब महशर का मंज़र देखिये’ पर बंधा समां
अदब सराय, बीकानेर के संस्थापक और वरिष्ठ शायर क़ासिम बीकानेरी ने बताया कि इस वर्ष तरही बज़्मे-मुसालमा के लिए मिसर-ए-तरह “कर्बला में है अजब महशर का मंज़र देखिये” मुक़र्रर किया गया था। इस ज़मीन पर शायरों ने एक से बढ़कर एक दिलकश और पुरअसर शेर पढ़े, जिसने सभागार में मौजूद श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
कलाम पेश करने वाले प्रमुख रचनाकारों में वली मोहम्मद ग़ौरी, क़ासिम बीकानेरी, सागर सिद्दीक़ी, इरशाद अज़ीज़, रमज़ान ‘राजजामी’, मोईनुद्दीन ‘मुईन’, अब्दुल जब्बार जज्बी, रहमान बादशाह, अमर जुनूनी, बरकात वारसी, महबूब देशनोकवी, साबिर बेकस और मोहम्मद ज़फ़र शामिल रहे। सभी शायरों ने अपने अफ़कार (विचारों) के जरिए अहले बैत और शहीदाने-कर्बला की अज़मत को बहुत ही संजीदगी से पेश किया।
तिलावत और नात-ए-पाक से हुई शुरुआत, देर रात तक डटे रहे अदबप्रेमी
मुशायरे का बाकायदा आगाज़ हाफ़िज़ सय्यद ज़िया मोहम्मद बीकानेरी द्वारा की गई तिलावते-कलाम-ए-पाक (कुरान पाठ) से हुआ। इसके बाद ना’तख़ां रमज़ान साहब ने बेहद पुरकशिश अंदाज़ में बारगाहे-रिसालत में नात शरीफ़ का नजराना पेश किया, जबकि सागर सिद्दीकी ने मनकबत और नितेश ने भी अपनी प्रस्तुति दी। इस रूहानी महफ़िल का लुत्फ़ उठाने के लिए मोहम्मद शाकिर और मोहम्मद अली मुग़ल सहित शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिक और अदबप्रेमी देर रात तक सभागार में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के प्रारंभ में अदब सराय के संस्थापक क़ासिम बीकानेरी ने दूर-दराज से आए सभी शायरों और मेहमानों का इस्तकबाल (स्वागत) किया। महफ़िल के आख़िर में नज़ीर ग़ौरी उर्दू अकादमी के संस्थापक वली मोहम्मद ग़ौरी ने सभी अतिथियों, अकीदतमंदों और आगंतुकों का शुक्रिया अदा करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। मुशायरे की शानदार और मुकम्मल निज़ामत (संचालन) वरिष्ठ शायर इरशाद अज़ीज़ ने अपने मख़सूस अंदाज़ में की।


