स्व. चंपालाल डागा की स्मृति सभा में परिजनों ने समाजोत्थान के कार्यों के लिए की ₹1 करोड़ 11 लाख की घोषणा

स्व. चंपालाल डागा की स्मृति सभा आयोजित हुयी
quicjZaps 15 sept 2025
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बीकानेर, 28 जून । गंगाशहर स्थित आचार्य नानेश रोटरी नेत्र चिकित्सालय और सुंदरदेवी डागा डायलिसिस सेंटर जैसी अनुकरणीय स्वास्थ्य संस्थाओं के संस्थापक, अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा बीकानेर संभाग के शीर्ष व्यक्तित्व स्वर्गीय चंपालाल डागा की स्मृति में रविवार को गंगाशहर के डागा गेस्ट हाउस में एक स्मृति सभा’ (श्रद्धांजलि सभा) का आयोजन किया गया। इस शोक सभा में जैन और अजैन समाज सहित देश के कोने-कोने से आए अनेक प्रबुद्ध नागरिकों ने स्वर्गीय डागा के विराट व्यक्तित्व व कृतित्व का स्मरण करते हुए उन्हें अपनी भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की।

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स्मृति सभा में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित कोलायत विधायक अंशुमान सिंह भाटी ने स्वर्गीय डागा को नमन करते हुए कहा, “चंपालाल जी डागा एक सच्चे धर्मनिष्ठ श्रावक, अद्वितीय दानवीर और आधुनिक युग के भामाशाह थे। डागा परिवार और भाटी परिवार का रिश्ता पीढ़ियों पुराना है। उन्होंने शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में जो जनकल्याणकारी कार्य बीकानेर की धरती पर किए हैं, वैसे कार्य बिरले ही व्यक्ति कर पाते हैं। जैन दिनचर्या का कठोरता से पालन करते हुए वे काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसी कषायों (विकारों) से सदैव मुक्त रहे और अपना पूरा जीवन परोपकार में लगा दिया। उनके यह कार्य बीकानेर वासियों और उनकी भावी पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणापुंज रहेंगे।”

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साधुमार्गी जैन संघ के पूर्व अध्यक्ष सिपानी ने की ऐतिहासिक घोषणा; डागा परिवार देगा ₹1.11 करोड़
श्रद्धांजलि सभा के दौरान अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रिद्धकरण सिपानी ने स्वर्गीय डागा के सांगठनिक अवदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि डागा जी ने राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के विभिन्न शीर्ष पदों पर रहकर समाज को नई दिशा दी और ‘श्रमणोपासक’ पत्रिका का लंबे समय तक कुशल संपादन भी किया। देव-गुरु-धर्म के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और व्यवहार में शालीनता व सहजता उनका मूल आभूषण थी। इस दुखद घड़ी में डागा परिवार के सेवाभावी संकल्पों को आगे बढ़ाते हुए सिपानी ने एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने बताया कि स्वर्गीय चंपालाल डागा की पावन स्मृति में डागा परिवार की ओर से ₹1 करोड़ 11 लाख की विशाल धनराशि सामाजिक, धार्मिक, शैक्षिक और चिकित्सा जनहित के परोपकारी कार्यों में विसर्जित (खर्च) की जाएगी।

आचार्य श्री रामलालजी महाराज का पढ़ा गया संदेश; देश-विदेश से पहुंचे प्रबुद्ध जन
कार्यक्रम में साधुमार्गी जैन संघ के वर्तमान आचार्य श्री रामलालजी महाराज साहब द्वारा प्रेषित विशेष पावन संदेश का वाचन और स्वर्गीय डागा का विस्तृत जीवन परिचय हेमंत सिंघी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इससे पूर्व संगीता डागा व बिंदु डागा ने नवकार महामंत्र के साथ मंगलाचरण किया तथा श्रीमती रेखा, सुनीता व गीतांजलि ने वैराग्यपूर्ण सुमधुर स्मृति गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।

स्वर्गीय डागा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करने वालों में साधुमार्गी संघ के कोषाध्यक्ष राजेश बच्छावत, जैन महासभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल बोथरा, जैन पाठशाला सभा के अध्यक्ष विजय कोचर, भाजपा नेता मोहन सुराणा, जीतो (JITO) अध्यक्ष जयचंद लाल डागा, रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष शशि मोहन मूंधड़ा, पूर्व पार्षद सुनील बांठिया, महावीर इंटरनेशनल के जे.एस. मेहता व सुरेश गुप्ता, नोखा के केसरीचंद गोलछा, शांत क्रांत संघ के पूर्व राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष जयचंद लाल सुखानी, साधार्मिक सेवा निधि के सुशील बैद, सुशील बच्छावत, सुनीत सुराणा, महेंद्र सोनावत, राजेंद्र सेठिया, सुरेंद्र पटवा, चंचल बोथरा, इंद्रमल सुराणा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महानगर संघचालक टेकचंद बरड़िया, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष जोशी, उद्योग संघ के पूर्व अध्यक्ष मनमोहन कल्याणी, राजेंद्र बालेचा तथा जैन यूथ क्लब के अध्यक्ष पारस डागा सहित लंदन से आए विशेष अतिथि अमित बैद, नरेंद्र सुराणा व दिलीप कातेला शामिल रहे।

परिजनों को बंधाया ढांढस, कई श्रावकों ने लिए उपवास व धार्मिक संकल्प

स्मृति सभा के समापन पर चम्पालाल जी डागा के छोटे भाई विमल डागा ने देश के विभिन्न कोनों जैसे दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, नोखा, देशनोक, भीनासर और बीकानेर से पधारे सभी श्रावक-श्राविकाओं व आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। शोक की इस घड़ी में उपस्थित जनों ने स्वर्गीय डागा के भाइयों, पुत्रों, पौत्रों व परिजनों—जयचंद लाल डागा, कमल, विमल, अशोक, अरुण, धीरज, अनिल, राकेश, मुकेश, नवीन, विकास, गौरव, विनीत, रोहित, अभिनव, सिद्धांत तथा पुत्रियों श्रीमती लीला बैद व श्रीमती मंजू बांठिया से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। स्वर्गीय डागा के संयमी जीवन से प्रेरणा लेते हुए सभा में उपस्थित अनेक श्रावकों ने आत्मा कल्याण के लिए उपवास (तपस्या) सहित कई धार्मिक नियम व त्याग के संकल्प ग्रहण किए।

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