वृक्ष लगाना ही नहीं, बल्कि उनका संरक्षण करना ज्यादा महत्वपूर्ण: कामिनी विमल भोजक मैया
वृक्ष लगाना ही नहीं, बल्कि उनका संरक्षण करना ज्यादा महत्वपूर्ण: कामिनी विमल भोजक मैया


बीकानेर, 3 जुलाई । सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बीकानेर की प्रमुख सामाजिक संस्था कल्याण फाउंडेशन ऑफ इंडिया एवं वंदे मातरम मातृशक्ति टीम के संयुक्त तत्वावधान में जय नारायण व्यास कॉलोनी स्थित विज्ञान पार्क (साइंस पार्क) में एक भव्य पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अभियान के तहत पार्क परिसर में जामुन, नींबू, बेलपत्र, मीठा नीम और सहजन सहित विभिन्न प्रजातियों के छायादार एवं बहुपयोगी औषधीय पौधे रोपे गए. साथ ही उपस्थित पर्यावरण प्रेमियों को इन पौधों के जीवित रहने तक उनकी देखभाल करने का अटूट संकल्प दिलाया गया.


फाउंडेशन की निदेशक और वंदे मातरम मातृशक्ति टीम की अध्यक्षा श्रीमती कामिनी विमल भोजक ‘मैया’ ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई. इस अवसर पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में अधिक से अधिक वृक्ष लगाना और उससे भी बढ़कर उनका निरंतर संरक्षण करना समय की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है. उन्होंने आमजन से प्रकृति को हरा-भरा बनाने के लिए पौधारोपण मुहिम से जुड़ने की भावुक अपील की.


कामिनी विमल भोजक मैया ने पौधों की सार-संभाल पर विशेष जोर देते हुए कहा, “अक्सर देखा जाता है कि लोग उत्साह में पौधे तो बहुत लगाते हैं, लेकिन बाद में उनकी सुध लेना भूल जाते हैं. हकीकत यह है कि जब हम इन पौधों का उचित संरक्षण करेंगे, तभी ये बड़े होकर वृक्ष बनेंगे. ये वृक्ष न केवल हमारी धरती और प्रकृति का श्रृंगार करते हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए सबसे जरूरी ‘प्राण वायु’ (ऑक्सीजन) का भी निर्माण करते हैं.” उन्होंने कहा कि आज हमें इसी बात का दृढ़ संकल्प लेना होगा कि हम भले ही संख्या में कम पौधे लगाएं, लेकिन उनके पूरी तरह बड़े होने तक संरक्षण की जिम्मेदारी स्वयं उठाएंगे.
विज्ञान पार्क में आयोजित इस प्रेरक पौधारोपण कार्यक्रम में सपना तिवाड़ी, विजयलक्ष्मी मूंधड़ा, दमयंती, लक्ष्मी हटीला, सुनीता खत्री, खुश भोजक एवं सीता शर्मा सहित मातृशक्ति की अनेक सदस्यों ने फावड़ा थामकर और पौधे रोपकर अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई. संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि इस पूरे आयोजन का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतीकात्मक रूप से पौधे लगाना नहीं था, बल्कि समाज के हर वर्ग में पर्यावरण के प्रति जवाबदेही और जागरूकता को बढ़ाना था, ताकि बीकानेर को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके.


