शांति निकेतन सेवा केंद्र पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी; सेवा केंद्र के नवनिर्माण कार्य की घोषणा


शांति निकेतन सेवा केंद्र पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी; सेवा केंद्र के नवनिर्माण कार्य की घोषण


गंगाशहर, 8 जुलाई . जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, गंगाशहर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आज विभिन्न प्रशासनिक व नगर निगम अधिकारियों ने गंगाशहर स्थित शांति निकेतन सेवा केंद्र का दौरा किया। इस अवसर पर बीकानेर पश्चिम नगर निगम की उपायुक्त दमयंती कंवर, अधीक्षण अभियंता पवन बंसल, गंगाशहर प्रभारी राजूराम और प्रभारी विनोद व्यास ने सेवा केंद्र में विराजित चारित्रआत्माओं (साध्वीवृंद) के दर्शन कर सेवा का लाभ लिया।


इस आध्यात्मिक मिलन के दौरान, साध्वी श्री रश्मियशा जी ने उपस्थित अतिथियों को जैन दर्शन की बुनियादी व व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए बच्छराज नाहटा ने तेरापंथ धर्म संघ में आचार्य परंपरा के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी लाडनूं में प्रवास कर रहे हैं, जहां ‘योगक्षेम वर्ष’ के अंतर्गत मुख्य रूप से साधु-साध्वियों और समण श्रेणी के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
तेरापंथी सभा के मंत्री जतन लाल संचेती ने गंगाशहर सेवा केंद्र की गतिविधियों की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में यहाँ 15 साध्वियों का प्रवास चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि साध्वी श्री त्रिशला कुमारी जी एक वर्ष की अवधि के लिए गंगाशहर सेवा केंद्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। पूज्य गुरुदेव प्रतिवर्ष कम से कम एक सेवाभावी साध्वियों के समूह को विशेष रूप से इस केंद्र पर सेवा के लिए नियुक्त करते हैं।
आगामी योजनाओं पर चर्चा करते हुए सभा के अध्यक्ष नवरतन बोथरा ने घोषणा की कि शांति निकेतन सेवा केंद्र के नवनिर्माण का कार्य बहुत जल्द शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, उपाध्यक्ष पवन छाजेड़ ने संस्था के सेवा क्षेत्र की व्यापकता की जानकारी देते हुए बताया कि अवस्था प्राप्त (वृद्ध व वरिष्ठ) साध्वियों की सेवा-संभाल के लिए मुख्य रूप से चार बड़े केंद्र संचालित हैं, जिनमें लाडनूं, बीदासर, श्री डूंगरगढ़ एवं गंगाशहर शामिल हैं, जबकि हिसार में एक उप-सेवा केंद्र कार्यरत है।
कार्यक्रम के अंत में मोतीलाल ललवानी ने सभी आगंतुक अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इससे पूर्व, सेवा केंद्र पधारने पर सभी प्रशासनिक अधिकारियों का साहित्य और संस्था का प्रतीक ध्वज (पताका) प्रदान कर आत्मीय स्वागत व अभिनंदन किया गया।


