वरिष्ठ समाजसेवी सोहनलाल सेठी का नागरिक अभिनंदन


विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य नागरिकों ने जताया सम्मान


बीकानेर, 8 जुलाई। भल्ला फाउंडेशन ट्रस्ट, बीकानेर के तत्वावधान में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सोहनलाल सेठी का नागरिक अभिनंदन समारोह रावला स्थित अनाज मंडी प्रांगण में बेहद गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। इस साहित्यिक एवं सामाजिक समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर सेठी के दीर्घकालीन सामाजिक योगदान के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की और उनका सम्मान किया।


समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सखा संगम के अध्यक्ष एन. डी. रंगा उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता मुक्ति संस्था के अध्यक्ष एडवोकेट हीरालाल हर्ष ने की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व पार्षद हजारी देवड़ा मंच पर आसीन रहे। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने अभिनंदन पत्र का वाचन करते हुए सोहनलाल सेठी के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि एन. डी. रंगा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सोहनलाल सेठी ने निस्वार्थ सेवा और सामाजिक समर्पण के माध्यम से समाज में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे उत्कृष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान करना समाज में सेवा और संस्कार की परंपरा को मजबूत करता है। कार्यक्रम के अध्यक्ष एडवोकेट हीरालाल हर्ष ने सेठी के जीवन को सेवा, सादगी और समर्पण का अनूठा उदाहरण बताते हुए कहा कि समाज की वास्तविक पूंजी ऐसे कर्मयोगी लोग हैं, जो बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के निरंतर जनहित में कार्य करते हैं। विशिष्ट अतिथि हजारी देवड़ा ने भी सेठी की सक्रियता को अनुकरणीय बताया।
समारोह के मुख्य पड़ाव में अतिथियों ने सोहनलाल सेठी को विधिवत अभिनंदन पत्र, शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया। इस भावुक क्षण में अपने सम्मान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सोहनलाल सेठी ने कहा कि समाज से मिला यह अपार स्नेह और सम्मान उन्हें जनसेवा के पथ पर और अधिक समर्पण एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा।
इस गरिमामयी आयोजन में जनमेजय व्यास, दयाराम सिंहासिया, पन्नालाल सेठी, चरणदास बजाज, लखपत गोदारा, श्रवण सहारण, कुलवंत तरड, ओमप्रकाश बरोड एवं सूरज बजाज सहित सामाजिक, साहित्यिक एवं विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े सैकड़ों गणमान्य नागरिक और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।


